PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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परवरिश

 

दोस्तो,

   आज के दौर में अधिकांश माता-पिता की यह शिकायत रहती है, कि उनका बच्चा…..

  • उनका कहना नहीं मानता !
  • बहुत लापरवाह careless, और जिद्दी हो गया है !
  • वो छोटी-छोटी बातों पर बहुत गुस्सा करता है !
  • उसे यही समझ नहीं है कि, उसके लिए क्या सही है और क्या गलत !
  • अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाने के बाबजूद भी, उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन (performance) नहीं कर पा रहा !
  • देखो ! पडोसी का बच्चा कितना होनहार (brilliant) है और हमारा !!!
  • उसके अन्दर गन्दी आदतें पड़ गयी हैं ( sigrate , गुटखा, ज्यादा से ज्यादा t.v देखना, पूरे दिन मोबाइल में मस्त रहना etc )
  • वो अपने दोस्तों या बाहर के लोगों की बात मानता है, उनकी तो सुनता तक नहीं !
  • उनका बच्चा उनकी उचित देखभाल या मान-सम्मान नहीं करता है ! वो, अपनी पत्नी के कहे में चलता है, और अपने माँ-बाप की जरा भी फिक्र नहीं करता !
  • पता नहीं आगे चलकर क्या करेगा ???
  • और भी न जाने क्या क्या ???

दोस्तो,

     आपकी चिंता जायज है ! आज जिधर देखो, उधर ऐसी ही ख़बरें सुनने या पढ़ने को मिलती हैं जिनसे यह आभास होता है कि, समाज में माता-पिता और उनके बच्चों के बीच के सम्बन्ध दिन प्रति दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं !

     यह सवाल दिन प्रति दिन और बड़ा होता जा रहा है कि, आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि हमारा अपना खून, हमारा अपना बच्चा ही हमसे दूर और बहुत अधिक दूर होता जा रहा है ???

दोस्तो,

     यह समय शिकायत करने या एक दूसरे में (माता-पिता, बच्चों, समाज या माहौल ) कमियां निकालने का नहीं है ! यह समय है अपने बच्चों को समझने का, उनको अपना बनाने का और उनकी परवरिश में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को सच्चे अर्थों में निभाने का  है !

 

समाधान (Solution)

 

दोस्तो,

     आज जहां समाज में सभी वर्गों ( शिक्षक, विद्यालय, नेता, डॉक्टर, या अन्य ) की विश्वसनीयता (credibility) तेजी से नीचे गिर रही है ! समाज में प्रेम-भाव कम हो रहा है तो ऐसे समय में एक माता-पिता की जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ जाती है……

तो आइये कुछ जरूरी बातों को अपने जीवन में अपनाएँ और एक बेहतर माता-पिता की भूमिका को और बेहतरीन बनाएं…..

  • यह सच है कि आज के समय में माता-पिता दोनों का कमाना जरूरी हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह भी तो नहीं कि आप अपने बच्चों को उनके हक़ का समय ही न दें ! आप उनको शुरू में ही day-care या boarding school में admission दिला दें और अपने कर्तव्यों को पूरा मान लें ! जबकि आपके लिए यह आवश्यक है कि अपने बच्चों को जितना संभव हो सके, ज्यादा से ज्यादा समय दें !
  • जब बच्चा छोटा हो (2-7 वर्ष तक) तो उसके साथ खेलें, उसके साथ घूमें ! उसमें अच्छी आदतों के बीज रोपित करें ( वो क्या खाए ? कैसे खाए ? कैसे खेले ? आदि )
  • जब बच्चा (7-12 वर्ष ) का हो तो उसके साथ बैठें, खेलें, खेलों के प्रति उसकी रूचि बढायें, पढाई को रोचक बनाने में उसकी जितनी ज्यादा हो सके उतनी मदद करें ! उसमें अच्छे से अच्छे संस्कार डालें ( कैसे लोगों से बात करे ? कैसे सभी का आदर करे, कितनी देर T.V. देखे और उसमें क्या देखे, नैतिक-शिक्षा की किताबें पढ़ायें आदि )
  • (12-17 वर्ष ) यह वो समय है जब बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है ! बच्चा तेजी से विकसित हो रहा होता है ! उसमें तेजी से शारीरिक बदलाव भी हो रहे होते हैं ! उसको जितना संभव हो सके Sex Education दें, ताकि बच्चे को कोई भी गलत दिशा में न भटका सके ! ऐसे समय में बच्चे को समझने की कोशिश करें ! उसके मन में उठ रहे सभी सवालों का पूरी तरह से समाधान करें ! उसको यह बताएं कि उसके लिए क्या सही है और क्या गलत ? उसको किस तरह के लोगों से दोस्ती करनी चाहिए ? उसकी निर्णय क्षमता को विकसित करें ! उसके आत्म-विश्वास को दृढ बनाएं ! उसके मन-मस्तिष्क के अन्दर इस बात को पूरी तरह से स्थापित (establish) कर दें कि : आप उसके सबसे बड़े हितैषी / शुभचिंतक (well-wisher) हैं, और वो अपनी कोई भी बात बिना किसी हिचक के साथ आपसे कह सके ! परिवार, समाज, और देश के प्रति उसके कर्तव्यों का बोध कराएं !
  • (17-22 वर्ष) यह किसी भी बच्चे के जीवन का बहुत ही निर्णायक समय होता है ! इसमें बच्चा जो भी Career चुनता है, उस पर उसका पूरा जीवन निर्भर करता है ! ऐसे महत्वपूर्ण समय में उसके सच्चे दोस्त बनें ! उसको बड़े सपने देखने और उनको पूरा करने का जूनून पैदा करें ! उसको सही career चुनने में मदद करें और उसको ऐसा माहौल दें ताकि वो अपने चुने लक्ष्य की तरफ पूरी ईमानदारी से आगे बढ़ सके ! उसके अन्दर इस विश्वास को जिन्दा कर दें कि वो, जो करना चाहे वो करे और पूरी ताकत के साथ करे ! उसे डरने या किसी भी तरह से अपना मन छोटा करने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि आप पूरी तरह से उसके साथ हैं ! यदि वो इस विश्वास के साथ अपने लक्ष्य (target) की तरफ बढ़ेगा तो यकीन मानिये कि उसकी सफलता (100 % guaranteed) निश्चित है !
  • जब वो (22 – 27 वर्ष ) के बीच में हो तो उसे गृहस्थ जीवन के बारे में, Financial management के बारे में उचित सलाह दें और उसे उसके जीवन में आगे बढ़ने में मदद दें !
  • और 27 वर्ष के बाद जब भी उसको आपकी जरूरत हो, एक अच्छे दोस्त की तरह उसके साथ खड़े रहें !!!
  • इसके साथ-साथ आप, अपने व्यवहार से उसके लिए आदर्श (ideal)  बनें ! आप भूलकर भी वो काम न करें, जो आप बच्चे से नहीं चाहते हैं ! आप स्वयं गलत काम न करें ( दहेज़ माँगना, बेटा-बेटी में भेद-भाव, झूठ बोलना, हर वक़्त Mobile / Laptop में व्यस्त रहना, अपने बड़ों को बुरा भला कहना, उनसे उचित व्यवहार न करना, सिगरेट या दारु पीना, गाली-गलौच आदि ) !
  • भूलकर भी अपने बच्चों के आत्म-विश्वास (self – confidence) पर चोट न करें ( उनको कभी भी ऐसा न बोलें : तुम तो बहुत कमजोर हो ! तुमसे तो कुछ भी नहीं हो पायेगा आदि )

दोस्तो,

    निराशा के इस माहौल में हमारे लिए आशा और ख़ुशी की बात यह है कि विशेषज्ञों ने इस बात को प्रमाणित किया है कि कोई भी जन्म से न तो अधिक होश्यार होता है और न ही अधिक बुद्धू ! न ही वो अच्छा होता है और न ही वो बुरा होता है ! न ही वो सुधरा होता है और न ही बिगड़ा ! एक बात जो उसके विकास या विनाश में प्रभावी भूमिका निभाती है वो है : उसकी परवरिश और आस पास का माहौल !

    हमें यह बात समझनी होगी कि हमारे बच्चे हमसे ही हैं ! वो हमारे ही प्रतिमूर्ति हैं ! वो किसी भी तरह से हमसे अलग नहीं हो सकते ! लेकिन इसके लिए हमें ही आगे आना होगा ! हमें अपने बच्चों को सच्चे मन से इस बात का अहसास कराना होगा कि हम ही उनके सबसे बड़े शुभचिंतक / हितैषी हैं !

यदि आप यह चाहते हैं कि आपके बच्चे आपको समझें, आपकी बात मानें, आपका  आदर करें, बुढापे में आपके काम आयें, आपको समय दें : उसके लिए पहले आपको  उनको समय देना होगा, उनका और उनकी भावनाओं का सम्मान करना होगा तभी आप अपने लिए एक बेहतर कल का निर्माण कर पाएंगे : क्यूंकि हमारी आने वाली संतान, वैसा ही व्यवहार करती हैं, जैसा वो देखती है और समझती है !

यदि आप अपनी संतान को योग्य और संस्कारवान देखना चाहते हैं, तो  इसकी नींव आज से ही डालनी होगी !

तो आइये ! शिकायत करना छोडिये और अपने कर्तव्यों का अच्छे से निर्वाह कीजिए ! अपने बच्चों की अच्छी से अच्छी परवरिश कीजिए और उनको बेहतर महौल दीजिए : फिर आपको अपने बच्चों की तरफ से कभी भी, किसी भी तरह की शिकायत का मौका नहीं मिलेगा और आप अपने बच्चों पर गर्व करेंगे !

तो जागिये ! इससे पहले की कहीं देर न हो जाए !!!

अपने बच्चों को सच्चे अर्थों में अपना बनाइये और समाज-देश को अच्छे नागरिक देने के अपने कर्तव्य का उचित निर्वाह कीजिए !!!

 

[ दोस्तो, यह विषय (Topic) बहुत बड़ा है ! इस पर जितना लिखा जाए वो कम ही होगा ! मैंने कम शब्दों में ही इस topic को cover करने की कोशिश की है ! उम्मीद है, मेरा यह प्रयास आपके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव का अग्रदूत बनेगा और आपके जीवन को खुश-हाल बनाने में एक प्रभावी भूमिका निभाएगा !!!)

 

आपका शुभचिंतक……..

आपका अपना मित्र 

Pranav Bhardwaj 

 


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

धन्यवाद!!!

 

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2 Comments on बच्चों की सही परवरिश कैसे करें ???

Pranav Bhardwaj (Author) said : administrator Report 7 months ago

thanks for visiting my website. and thanks for my effort.  

Jamshed Azmi said : Guest Report 7 months ago

बच्चों की सही परवरिश कैसे हो, यह आपने बहुत ही अच्छे ढंग से समझाया है। बहुत ही उम्दा किस्म का मोटीवेशन है। http://www.kanafusi.com/uc-news-income-proof/

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