PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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यथा दृष्टि, तथा सृष्टि

By on November 24th, 2016

 

यथा दृष्टि, तथा सृष्टि

 

दोस्तो,

       बहुत समय पहले की बात है ! एक शहर में, एक मिठाई की दूकान थी ! वहां की मिठाई बहुत मशहूर थी ! मिठाई के साथ-साथ वहां की लस्सी और समोसे बहुत प्रसिद्ध थे ! लोग बहुत दूर-दूर से वहां लस्सी और समोसे खाने के लिए आते थे !

       एक बार की बात है ! कुछ लोग वहां बैठकर लस्सी और समोसे खा रहे थे कि, तभी एक कौवा उड़ता हुआ आया ! उस कौवे को बहुत तेज भूख लगी थी ! इसीलिए उस कौवे ने एक व्यक्ति की लस्सी में चोंच मारी और उड़ गया ! उस व्यक्ति को बहुत गुस्सा आया ! उसने, पास से ही एक छोटा सा कंकड़ उठाया और उड़ते कौवे को निशाना बनाते हुए मार दिया ! कौवे का समय खराब था, कंकड़ सीधा कौवे को लगा और थोड़ी ही देर में कौवे की मौत हो गयी !

      इस घटना को वहां बैठा एक कवि बहुत ध्यान से देख रहा था ! कवि ने इस घटना को देखकर एक पंक्ति लिखी ! उसने, एक कोयले के टुकड़े से पंक्ति लिखी, जो इस तरह से थी …..

काग  दही  पर, प्राण  गंवायो !!!

(कौवे ने दही के लालच में, अपनी जान गंवा दी )

कवि यह लिखकर चला गया !

      थोड़ी देर बाद, वहां एक Accontant महोदय आये ! उन्होंने लस्सी और समोसे का आर्डर दिया और इंतज़ार करने लगे ! Accontant महोदय पर एक मुकद्दमा चल रहा था ! उन पर कार्यालय में, कागजों की हेरा-फेरी कर — काफी पैसे इधर से उधर करने का केस चल रहा था ! वो बहुत परेशान थे और उसी बारे में सोच रहे थे !

इतने में ही उनकी नजर कवि द्वारा लिखी गयी उस पंक्ति पर पड़ी ! क्यूंकि वो अपनी ही चिंता में परेशान थे, तो उन्होंने उस पंक्ति को इस प्रकार पढ़ा…..

कागद, ही पर प्राण गंवायो !

      उन्होंने इस पंक्ति को कुछ इस तरह समझा —- कागज, ही पर उनकी जान जाएगी – अर्थात जो उन्होंने कार्यालय में महत्वपूर्ण कागजों की हेरा-फेरी की है, वो उनको भारी पड़ेगी ! और हो सकता है कि, उनको इसकी कीमत अपनी नौकरी से चुकानी पड़े !

      वो पहले से ही बहुत परेशान थे लेकिन इस पंक्ति को पढ़कर और अधिक परेशान हो गये ! Accountant महोदय, बिना लस्सी-समोसे खाए ही वहां से चले गये !

      थोड़ी देर बाद वहां एक 20 साल का नवयुवक आया ! वो बहुत दुखी था ! उसकी परेशानी का कारण उसकी प्रेम कहानी थी ! उसकी प्रेमिका ने उसको धोखा दिया था और वो चाहकर भी इस बात को, भूल नहीं पा रहा था ! वो इतना परेशान था कि वो अपनी जान देने के बारे में सोच रहा था !

इतने में ही उसकी नजर भी, कवि द्वारा लिखी गयी पंक्ति पर पड़ी ! और उसने उस पंक्ति को अपने ही अंदाज में पढ़ा ! उसने पढ़ा…..

का, गदही पर प्राण गंवायो ???

अर्थात – क्या गधी पर जान गँवाएगा ??? उसने सोचा कि, गलती उस लड़की की है और उसके चक्कर में पड़कर, मैं क्यूँ अपनी जान गंवाऊं ??? नहीं ! मुझे अपनी जान नहीं देनी चाहिए !!!

वो यह पढ़कर बहुत खुश हुआ – और उसने ख़ुशी- ख़ुशी दो लस्सी और 5 समोसे खाए और वहां से चला गया !

दोस्तो,

कितनी विचित्र बात है ???

यदि आप ध्यान से देखें तो —- पंक्ति एक ही है – लेकिन अलग-अलग लोगों ने उस पंक्ति को, अपने-अपने तरीके से पढ़ा और उसका अलग-अलग अर्थ निकाला !

किसी को उससे मुश्किल हुई, तो किसी को जीवन जीने की एक नयी दिशा मिल गयी !

दोस्तो,

     इस सम्बन्ध में, एक पुरानी कहावत भी है, जो इस प्रकार से है…..

जो जिस रंग का चश्मा पहनता है, उसे हर चीज – उसी रंग की नजर आती है !

     अर्थात यदि हम काला या हरा चश्मा लगायेंगे तो हमें, हर चीज काली या हरी ही नजर आएगी ! इसका सीधा सा अर्थ यह है कि, जो कुछ है वो हमारे अन्दर ही है, – दुनिया की हर ख़ुशी, हर सुख, हर दौलत हमारे अन्दर ही मौजूद है !

     यदि हम अन्दर से (मन से) खुश हैं, संतुष्ट हैं, ऊर्जा से भरे हुए, प्यार से भरे हुए हैं, अच्छे विचारों से ओत-प्रोत हैं, हमारी सोच positive है, तो हमें अपने आस – पास हर चीज में ख़ुशी, प्यार, अच्छाई, positivity का सुखद ऐहसास होगा और हम हर पल में आनंदित-उत्साहित और खुश रहेंगे, लेकिन यदि हम अन्दर से (मन से) दुखी, अस्वस्थ, थके हुए, डरे हुए, गंदे विचारों से भरे हुए, ईर्ष्या से जले हुए, सोच से negative हैं तो हमें हर तरफ मुश्किल और परेशानी ही महसूस होगी ! हम अपना — हर पल दुखद, चिडचिडा और शिकायत भरा बना लेंगे ! हमें, हर तरफ कोई न कोई कमी, बुराई नजर आएगी और हम चाहकर भी खुश नहीं रह पायेंगे !

दोस्तो,

      इस बात को आप इस तरह से भी समझ सकते हैं :-

      आप एक ऑफिस में काम करते हैं ! आप अपनी office से थके हुए, अपने घर पंहुचते हैं ! अधिक काम होने के कारण आप एक सप्ताह से ठीक से सो नहीं पाए है और थकान के कारण आप सोचते हैं कि घर जाकर तुरंत ही सोया जाए लेकिन जैसे ही आप अपने घर पहुँचते हैं तो आपको बताया जाता है कि आज सभी लोगों ने Movie देखने का प्रोग्राम बनाया है ! और संयोगवस आपको वो movie बहुत पसंद है ! इस स्थिति में आपकी पूरी थकान एक ही मिनट में गायब हो जाती है ! और आप सोने के बजाए ख़ुशी-ख़ुशी तैयार होकर movie देखने चले जाते हैं !

     अभी आप बहुत थके हुए थे, लेकिन movie की बात सुनकर आपकी पूरी थकान गायब हो गयी ! क्युंकी आप उस movie को देखने के लिए उत्साहित थे ! और आपके मन का उत्साह आपके शारीरिक थकान पर भरी पड़ा और आपकी सारी थकान एक ही मिनट में गायब हो गयी ! कुछ ऐसा होता है मन की ख़ुशी / रोमांच का प्रभाव

     अतः हम कह सकते हैं कि, यदि हम मन से खुश हैं तो हमें हर तरफ ख़ुशी ही ख़ुशी आनंद ही आनंद का सुखद अहसास होगा लेकिन यदि हम मन से…….

    यहाँ इस बात को भी कहा जा सकता है कि, हम जिस नजर या सोच के साथ दुनिया को देखते हैं, हमें दुनिया वैसी ही नजर आती है !

    क्युंकी

यथा दृष्टि, तथा सृष्टि

 

तो आइये ! अपने मन को सभी तरह के डर, बुराइयों, गंदे विचारों से आज़ाद करें और अपने मन को ख़ुशी, प्यार, अच्छाइयों और अच्छे विचारों से भरकर जिंदगी को नए सिरे से जीयें !

 

आपके सुख-दुःख का साथी

आपका अपना मित्र

प्रणव कुमार


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

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धन्यवाद!!!

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