PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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ShriMadBhagwat Geeta : Anmol Updesh Aur unki upyogita

By on October 18th, 2016

 

 

श्रीमद्भागवत गीता : अनमोल उपदेश व उनकी उपयोगिता 

 

दोस्तो, आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति जल्दी से जल्दी अमीर बनना चाहता है और वो भी बिना कुछ किये ! इसी कारण, व्यक्ति का जीवन दिन प्रति दिन नीरस होता जा रहा है — ऐसे मुश्किल समय में पूज्यनीय ग्रन्थ श्रीमद्भागवत गीता की उपयोगिता बहुत अधिक बढ़ जाती है !

     श्रीमद्भागवत गीता बहुत ही पवित्र और पूजनीय ग्रन्थ है ! इसमें भगवान् श्री कृष्ण, अर्जुन को जीवन का उपदेश देते हैं ! यह ग्रन्थ हमें कर्त्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है ! इसमें दिए गये अमृत वचनों को अपने जीवन में अपनाकर हम पूरी तरह से एक सुखी, सफल और खुश-हाल जीवन जी सकते हैं !

     यहाँ मैंने श्रीमद्भागवत गीता के कुछ श्लोकों का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ आज के समय में उनकी, हमारे जीवन में उपयोगिता को भी व्यक्त करने की कोशिश की है !

आइये ! इनको जीवन में धारण करके अपने जीवन को सफल बनायें…..

 

उपदेश : मैं सभी प्राणियों के ह्रदय में विद्यमान हूँ

आज के समय में इसकी उपयोगिता :—

     दोस्तो, आज के जमाने में इंसान की पहचान उसके पैसों से ही होती है ! जिसके पास पैसे हैं लोग उसे मान-सम्मान देते हैं, जबकि गरीब लोगों का अक्सर ही मजाक बनाया जाता है / उसे सम्मान नहीं मिलता ! ऐसे समय में श्रीमद्भागवतगीता हमें यह शिक्षा देती है कि हमें प्रत्येक व्यक्ति को उचित मान सम्मान देना चाहिए, भूलकर भी किसी का अपमान या उसकी भावनाओं का निरादर नहीं करना चाहिए — क्यूंकि हर इंसान / हर प्राणी में भगवान् का वास है ! इसके साथ-साथ, श्रीमद्भागवत गीता, हमें जीव-जंतुओं के प्रति दयालु भाव रखने की प्रेरणा भी देती है !  

 

उपदेश : कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं !

आज के समय में इसकी उपयोगिता :—

     दोस्तो, ज्यादातर लोगों की यही समस्याएँ रहती है कि मैंने उस व्यक्ति के साथ यह किया लेकिन आज जब मुझे जरूरत है तो उसने मना कर दिया या मैंने उसके साथ अच्छा किया और उसने मेरे साथ गलत किया —- अर्थात हम, जब कोई काम करते हैं तो उसके बदले में फल की भी इच्छा रखते हैं और यही हमारे दुखों का कारण बन जाता है ! इस स्थिति में श्रीमद्भागवत गीता हमें यह सिखलाती है कि हमें कोई भी काम बिना किसी अपेक्षा के करना चाहिए ! हमारा काम केवल और केवल काम करना है … फल पर हमारा कोई अधिकार नहीं – फल देने का काम परमात्मा का है ! अतः हमें निस्वार्थ भाव से अपना काम करना चाहिए और सब कुछ परमात्मा पर छोड़ देना चाहिए ! यही सुखी जीवन की कुंजी भी है !

 

उपदेश : किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि अपना काम करें, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े !

आज के समय में इसकी उपयोगिता :—

     दोस्तो – आज के समय में अधिकाँश लोग ऐसे हैं, जो किसी कंपनी में काम कर रहे हैं / या कोई अपना business कर रहे हैं और सफल भी हैं लेकिन फिर भी खुश नहीं क्यूंकि वो चाहते हुए भी अपने मन का कार्य नहीं कर पा रहे हैं — ऐसे समय में श्रीमद्भागवत गीता हमें यह सिखलाती है कि, हमें जो पसंद है, हम जो करना चाहते हैं — उसे हम अपने पूरे मन से करें भले ही हमारे पास उसको पूरा करने के पर्याप्त साधन का अभाव ही क्यों न हो – क्यूंकि यदि आप किसी काम को पूरे मन से करोगे तो एक न एक दिन आप सफल हो ही जाओगे और उससे भी बड़ी बात की आप खुश भी रह पाओगे और यही सच्ची सफलता है !  

 

उपदेश : सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में  है ना ही कहीं और

आज के समय में इसकी उपयोगिता :—

     दोस्तो, शक करना और प्रसन्न रहना दोनों एक-दम विपरीत पहलु हैं ! यदि आप अपने जीवन में प्रसन्न रहना कहते हैं / सफल होना चाहते हैं — तो आपको शक करना छोड़ना होगा क्यूंकि जो व्यक्ति शक करता है वो कभी भी और किसी भी हालत में खुश नहीं रह सकता ! श्रीमद्भागवत गीता हमें यह शिक्षा देती है कि — जब भी हम कोई काम करें तो उसको पूरे विश्वास के साथ पूर्ण करें ! हम भूल कर भी स्वयं पर किसी भी तरह का शक न करें ! हम यह न सोचें की हम इस काम में सफल हो पाएंगे या नहीं या हम यह काम कर पायेंगे या नहीं किन्तु हम स्वयं से कहें की हमने जो काम अपने हाथ में लिया है मैं उस काम को पूरा करने में पूर्ण योग्य हूँ और हर हाल में इस काम में सफलता हासिल करूँगा ! आपकी सफलता निश्चित है – और प्रसन्नता भी !

 

उपदेश : उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, न कभी था और न कभी होगा : जो वास्तविक है  वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता !

आज के समय में इसकी उपयोगिता :—

     दोस्तो – आज के समय में अधिकाँश लोगों (100 में से 99) की एक ही समस्या है कि आने वाले कल (भविष्य) में क्या होगा ? और प्रत्येक व्यक्ति भविष्य को सुरक्षित करने के चक्कर में लगा हुआ है और परेशान है और हर वक़्त डर में रहता है – वो कोई भी काम शुरू करता है तो सोचता है की यदि ऐसा हो गया तो, वैसा हो गया तो …… और इसी if & but में परेशान रहता है —- ऐसे समय में श्रीमद्भागवत गीता हमें यह सिखलाती है कि हमें उस बात की कोई चिंता नहीं करनी चाहिए जो काल्पनिक है – जो भविष्य की है ! हमें केवल अपने आज में जीना चाहिए और वास्तविकता में जीना चाहिए क्यूंकि वर्तमान ही जीवन है ! हमें अपने आज में खुश रहते हुए tension-free जीवन जीना चाहिए !

 

उपदेश : Feelings of heat and cold, pleasure and pain, are caused by the contact of the senses with their objects. They come and they go, never lasting long. You must accept them.

आज के समय में इसकी उपयोगिता :—

     दोस्तो, जिस प्रकार से गर्मी आती है, सर्दी आती है – सुख आता है, दुःख आता है — लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ भी बहुत समय तक नहीं रहता ! श्रीमद्भागवतगीता से हम यह सीख सकते हैं, कि यदि आज हम, किसी तरह की परेशानी / दुःख में हैं — तो हम उसका शोक न मनाएं क्यूंकि यह बुरा समय हमेशा नहीं रहने वाला है ! परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है – अतः हमें सुख में ज्यादा सुखी और दुःख में ज्यादा दुखी नहीं होना चाहिए ! यह जीवन है, इसमें उतार – चढ़ाव आयेंगे ही ! हमें पूरे धैर्य के साथ प्रत्येक परिस्थिति का सामना करना चाहिए और अपने जीवन को निरंतर आगे बढाते रहना चाहिए !

 

उपदेश : तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नहीं हैं, और फिर भी ज्ञान की बाते करते हो ! बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं !

आज के समय में इसकी उपयोगिता :—

     दोस्तो, जब किसी का कोई बहुत प्रिय या अपना मृत्यु को प्राप्त होता है, तो इसकी पीड़ा बहुत गहरी होती है ! उसके दुखों को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता ! – लेकिन इस दुःख की घडी में श्रीमद्भागवत गीता हमें यह शिक्षा देती है कि यह सत्य है कि जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है ! आपके लिए समय मुश्किल है लेकिन हिम्मत करिए और जिंदगी को आगे बढाइये क्यूंकि हमारी आत्मा अजर-अमर है और वो कभी मर नहीं सकती ! तो आप भी  इस बात का शोक न मनाइए और जीवन में कर्म करते हुए आगे बढिए !

 

            विनम्र – निवेदन : प्रिय मित्रों, आज मैंने प्रातः स्मरणीय, पूजनीय, पवित्र ग्रन्थ श्रीमद्भागवत गीता के अनमोल वचनों का हिंदी अनुवाद और उनकी आज के समय में उपयोगिता को व्यक्त करने का प्रयास किया है, किन्तु यदि मुझसे अनजाने में कोई गलती हो गयी हो तो उसके लिए मुझे क्षमा कीजिएगा और अपने सुझाव email ( bhardwaj.pranav99@gmail )  के माध्यम से हमें भेजिएगा !

 

आपका अपना मित्र 

प्रणव भारद्वाज 


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

 

धन्यवाद!!!

 

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