PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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है हिम्मत – तो, जीत लो दुनिया 

By on October 12th, 2016

 

है हिम्मत – तो, जीत लो दुनिया 

 

 

एक बहुत पुरानी और प्रसिद्ध कहावत है….

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

 

दोस्तो,

      शारीरिक विकलांगता से बड़ी होती है, मन की विकलांगता ! यदि आप मन से विकलांग हैं, कमजोर हैं तो दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत भी आपको सफल नहीं बना सकती, लेकिन यदि आप मन से शशक्त (powerful) हैं, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत भी आपको सफल होने से नहीं रोक सकती ! सारा खेल — मन की शक्ति का ही तो है !

     मन की इस अद्भुत और चमत्कारिक शक्ति का जीता जागता उदाहरण हैं —-

     पदम् श्री अरुणिमा सिन्हा जी, ( First Indian Female Amputee [अपंग ] to climb Mount Everest ) जिन्होंने (Train accident) में अपना एक पैर गंवाने के बाबजूद, अपनी हिम्मत के दम पर सफलता की ऐसी विराट और भव्य कहानी लिखी जो अपने आप में बहुत साहसिक और प्रेरणादायी है ……

उन्होंने यह बता दिया की यदि हम हिम्मत से काम लें, तो हम बहुत आसानी के साथ इस दुनिया पर विजय प्राप्त कर सकते हैं ! और विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी वो सब कुछ पा सकते हैं — जो हम पाना चाहते हैं !

आइये ! इनके जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सफल बनाएं !

 

प्रारभिक जीवन :

     अरुणिमा सिन्हा जी का जन्म लखनऊ से 200 km. दूर आंबेडकरनगर नामक जिले में हुआ था ! इनके पिता सेना में इंजीनियर थे, जबकि इनकी माँ स्वास्थ्य विभाग में पर्यवेक्षक (supervisor) थी ! बचपन में ही इनकी माँ का देहांत हो गया, जब इनकी उम्र मात्र 3 वर्ष की थी ! अरुणिमा जी की एक बड़ी बहिन और एक छोटा भाई था ! जब ये थोड़ी बड़ी हुई, इनके पिता जी का भी देहांत हो गया ! परिवार के सामने बहुत संकट आ गया ! इस संकट की घडी में, इनकी बहिन के पति ने बहुत मदद की और पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर ले ली !

     Post – Graduation करने के बाद, अरुणिमा ने Law की पढाई पूरी की और Law के क्षेत्र में career बनाने की कोशिश की !       अरुणिमा जी को बचपन से ही खेल-कूद में विशेष रूचि थी ! footbaal और bollybaal इनका प्रिय खेल होता था ! खेलों में गहरी रूचि के कारण ये National Level की vollyball player बन गयी थी !

     खेल में इनकी रूचि को देखते हुए, घर के मुखिया अर्थात इनके जीजाजी ने सुझाव दिया कि तुम ARMY में Apply करो ! उन्होंने समझाया कि Army में एक खेल कोटा होता है, जिसमे खिलाड़ियों पर पूरा ध्यान दिया जाता है और उनको अच्छी से अच्छी सुविधाएं दी जाती है ताकि देश के लिए अच्छे खिलाड़ी तैयार किये जा सकें ! इसमें selection हो जाने से तुम अपने खेल के भी करीब रहोगी और साथ-साथ अपना भविष्य भी सुनहरा बना लोगी !

     उनकी इसी सलाह को मानते हुए, अरुणिमा ने CISF में Apply किया ! लेकिन जब उसे  call-letter मिला तो उसमें, अरुणिमा की Date of Birth गलत हो गयी थी ! अरुणिमा को  पूरी उम्मीद थी की यदि यह technical गलती दूर हो जाती है तो उसे यह job आसानी से मिल जाएगी ! और उसके सभी सपने सच हो जाएंगे !

इसी कोशिश में अरुणिमा, अपने घर से दिल्ली के लिए निकल पड़ी !

 

मुश्किल घडी :–

     11 अप्रैल, 2011,  अरुणिमा ने पद्मावत एक्सप्रेस पकड़ी और दिल्ली का suffer शुरू कर दिया ! वो, अपने आने वाले अच्छे समय के सपने देखने लगी ! तभी 4 – 5 लड़कों ने उसे घेर लिया और वो उसके गले में पड़ी सोने की चैन को खींचने की कोशिश करने लगे ! पर अरुणिमा ने भी हिम्मत नहीं हारी और पूरी कोशिश से अपना बचाव किया ! लेकिन उन लोगों के सामने उसकी एक न चली और उन्होंने उसे चलती train से नीचे फेंक दिया !

     अरुणिमा, गिरते ही बेहोश हो गयी ! वहां से 49 ट्रेन इधर से उधर निकली पर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया ! वो पूरी रात ऐसी ही ट्रैक पर पड़ी रही ! उसका, एक पैर कट चुका था और उसको बहुत तकलीफ थी ! सुबह, जब गाँव के लोगों ने देखा, तो उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया ! जब अरुणिमा की आँख खुली, तो वो एक होस्पिटल में थी !

     अरुणिमा को कुछ, समझ ही नहीं आ रहा था ! एक ही पल में उसकी जिंदगी पूरी तरह से पलट गयी थी ! कल जहाँ, वो अपने सुनहरे सपनों में खोयी थी वहीँ आज इतनी मुश्किल घडी में ! वो बहुत परेशान हो रही थी ! जो भी उसको देखने आता वो उसके दुःख पर आंसू बहाता और कहता कि अब इस लड़की का क्या होगा ? कैसे यह अपनी जिंदगी गुजार पाएगी ? इस हालात में, कौन इससे शादी करेगा ? इसका तो जीवन ही बर्बाद हो गया !!!

     सभी लोग बहुत परेशान थे, लेकिन अरुणिमा के मन में कुछ और ही चल रहा था ! उसने सोचा कि यदि इतनी परेशानियों के बाबजूद —- आज अगर वो जिन्दा है, तो यह ऐसे ही नहीं है — इसके पीछे जरूर भगवान् का कोई न कोई बड़ा मकसद होगा ! शायद भगवान् उससे कुछ बड़ा काम करवाना चाहते हैं ! उसने भगवान् को धन्यवाद दिया और कुछ बड़ा करने की ठान ली !

     जब वो ठीक हुई तो वो अपने घर नहीं गयी वो वहां से सीधी बछेंद्री पाल जी ( एवेरेस्ट फतह करने वाली प्रथम भारतीय महिला ) के पास गयी और बताया कि वो भी एवेरेस्ट फतह करना चाहती है !

     बछेंद्री पाल ने उसकी हिम्मत की तारीफ़ की और उससे कहा कि इतनी मुश्किल के बाद भी यदि यह ख़याल तेरे मन में आया है तू तो एवेरेस्ट फतह कर चुकी, बस दुनिया को अब तारीख का पता होना बाकी है !

     अरुणिमा की पूरी ट्रेनिंग बछेंद्री पाल जी की देख-रेख में पूरी हुई ! 18 महीने की कड़ी मेहनत  के बाद उसने, अपने मिशन की शुरुआत की ! शुरू में शारीरिक और आर्थिक, बहुत तकलीफ हुई पर जब tata steel ने उसे scholarship दी तो उसने पूरे जोश के साथ और पूरी focus के साथ अपने मिशन की तरफ कदम बाधा दिए !

अरुणिमा के कृत्रिम (artifitial) पैर के साथ मुश्किल यह दी की कभी-कभी उस पर सूजन आ जाती थी, जिससे उसे बहुत तकलीफ होती थी ! साथ ही साथ उसके सीधे पैर में भी लोहे की रोड थी, चढ़ाई के दौरान उसे बहुत मुश्किल होती थी ! उसे बताया गया की यह काम तुम्हारे बस की बात नहीं है – ऐसा करना मानो मौत के मुह में जाना हो – लेकिन उसने, अपने मन को अच्छे से समझा लिया कि अब चाहे कुछ हो जाए मुझे Everest फतह करना ही है !

52 दिनों की कठिन चढ़ाई के बाद आखिरकार, वो मुबारक सुबह भी आ गयी जब, अरुणिमा अपने सपने को साकार करने वाली थी ! |

21 मई 2013 को उन्होंने एवेरेस्ट फतह कर ली | एवेरस्ट फतह करने के साथ ही वे विश्व की पहली विकलांग महिला पर्वतारोही बन गई|

मैंने अपना सपना साकार कर लिया था — मैं बहुत खुश थी ! मैंने जो सोचा – वो सपना साकार कर दिखाया वो मेरे जीवन का सबसे हसीन पल था !

एवरेस्ट फतह करने के बाद भी वे रुकी नहीं ! उन्होंने विश्व के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची पर्वत चोटियों को फतह करने का लक्ष्य रखा ! जिसमें से अब तक वे कई पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी है और वे अपने इस लक्ष्य पर लगातार आगे बढ़ रही है !

सामाजिक योगदान :—

अरुणिमा गरीब बच्चों के लिए एक स्कूल चलाती हैं !

इसके अलावा वो शहीद चंद्रशेखर आज़ाद खेल अकादमी भी चलाती हैं !

उनका सपना इस अकादमी को बहुत ऊँचे लेवल पर ले जाना है ! इसके जरिये वो देश को अच्छे और योग्य खिलाड़ी देना चाहती हैं वो कहती हैं की …………. मुझे इस मिशन को पूरा करना के लिए 25 करोड़ रुपये की जरूरत है जबकि मेरे पास 25000 भी नहीं लेकिन वो यह भी कहती हैं कि जब मैंने एक पैर के साथ एवेरेस्ट फतह कर ली तो यह 25 करोड़ भी आ ही जाएँगे !

वो कहती हैं………….

रहने दे आसमान, तू जमीन की तलाश कर ! रहने दे आसमान, तू जमीन की तलाश कर !!

सब कुछ यहीं है, कहीं और न तलाश कर ! बस, जीने के लिए, एक कमी की तलाश कर !!

उपलब्धियां :—-

  • 2015 में इनको पदम् श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था !
  • एवेरेस्ट फतह करने वाली प्रथम विकलांग महिला
  • इसके साथ साथ इन्होने सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची पर्वत चोटियों को फतह करने का लक्ष्य रखा | जिसमें से अब तक : Everest in Asia, Kilimanjaro in Africa, Elbrus in Europe and Kosciuszko in Australia पर झंडा फहरा चुकी हैं और वे अपने इस लक्ष्य पर लगातार आगे बढ़ रही है |
  • अरुणिमा ने केवल पर्वतारोहण ही नहीं, आर्टीफीशियल ब्लेड रनिंग में भी अपनी धाक जमाई है ! इसी वर्ष चेन्नई में हुए (पैरा) ओपन नेशनल गेम्स में 100 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक लेकर इतिहास रचा !
  • अरुणिमा ने एक किताब भी लिखी है जिसका नाम है === 'Born again on the mountain' जिसका विमोचन आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने किया था !

दोस्तो,

       अरुणिमा जी, शारीरिक विकलांगता के बाबजूद भी इतनी बड़ी सफलता हासिल की और  साहस के दम पर, दुनिया को यह दिखा दिया कि यदि कोई व्यक्ति कुछ करने की ठान ले तो वो असंभव को भी संभव बना सकता है !

       वाकई में, यदि यह हो सकता है — तो कुछ भी हो सकता है !

तो आइये !

                            इस वाक्य को         है हिम्मत – तो, जीत लो दुनिया       अपनी जिंदगी का आधार बनायें 

और वो सब कुछ पा लें जो पाने के सपने देखते हैं या पाना चाहते हैं ! क्योंकि सब खेल हिम्मत का ही तो है !

 

 

आपके सुखी & सफल जीवन का आकांक्षी……

आपका अपना दोस्त,

Pranav Bhardwaj


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

धन्यवाद!!!

 

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2 Comments on है हिम्मत – तो, जीत लो दुनिया 

Pranav Bhardwaj (Author) said : administrator Report 8 months ago

thanks for appriciating me. sir maine apki website visit ki hai aap mere se bhi bahut achcha likhte hain. thanks again 

surendra mahara said : Guest Report 8 months ago

नमस्कार प्रणव जी, आपका ब्लॉग देखकर बहुत अच्छा लगा. आपने बहुत ही बढ़िया ब्लॉग बनाया है. आपकी कहानियाँ व आर्टिकल काफी बेशकीमती और ज्ञानवर्धन वाली है. ऐसे ही लिखते रहे और हम जैसे लोगो को मोटीवेट करते रहे. All the Best...

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