PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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सफलता  का  आधार

By on August 6th, 2016

 

सफलता  का  आधार : हमारी  प्राथमिकतायें 

 Foundation Of Success : Our Priorities 

 

दोस्तो,

       बहुत समय पहले की बात है ! किसी जंगल में एक गर्भवती हिरणी थी, जिसका प्रसव (Delivery ) होने को ही था ! उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घास के पास एक जगह देखी, जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा ! अचानक उसे प्रसव पीड़ा (Pain) शुरू होने लगी, कि तभी उसने देखा, आसमान में काले-काले बादल छा गए और घनघोर बिजली कड़कने लगी ! बिजली गिरने से घने जंगल मे आग लग गयी !
     उसने वहां से भाग जाना उचित समझा, लेकिन जैसे ही हिरणी ने अपनी दायीं तरफ  देखा : वहां एक बहेलिया उसकी ओर तीर का निशाना लगाये हुए था और उसकी बाईं तरफ : एक शेर उस पर घात लगाये हुए, उसकी ओर बढ़ रहा था !

     हिरणी पर तो मानो, मुसीबत का पहाड़ ही टूट पड़ा हो ! वो बुरी तरह घबरा गयी ! उसको समझ ही नहीं आ रहा था कि, इन विषम परिस्थितियों में वो करे भी —— तो क्या करे ???

     एक तरफ तो वह प्रसव-पीड़ा के असहाय दर्द से गुजर रही थी वहीँ उसके मन में अनेक तरह के सवाल चल रहे थे……….वो सोच रही थी…….

  • अब क्या होगा ???
  • क्या वो सुरक्षित रह पाएगी ???
  • क्या वो अपने बच्चे को जन्म दे पाएगी ???
  • क्या वो नवजात शिशु सुरक्षित रह सकेगा ???
  • या सब कुछ जंगल की आग मे जल कर ख़ाक हो जाएगा ???
  • अगर आग से बच भी गयी — तो क्या वो बहेलिये के तीर से बच पायेगी ???
  • या क्या वो उस खूंखार शेर के पंजों की मार से दर्दनाक मौत मारी जाएगी ???
    जो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रहा था !

उसके एक ओर जंगल की भयंकर आग, तो  दूसरी ओर तेज धार वाली बहती नदी,

एक ओर निशाना लगाये बहेलिया तो दूसरी तरफ शेर जैसा खूंखार शिकारी !

बड़ी ही विचित्र और संकट-पूर्ण घडी थी ! कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ! लेकिन उसने धैर्य से काम लिया !

उसने सोचा कि, जिन परिस्थितियों पर — मेरा कोई अधिकार ही नहीं है !

उनके बारे में सोचकर या चिंतित होकर, भला क्या फायदा ???

…. जिन पर मेरा पूर्ण अधिकार है अर्थात् जो मेरी पहली प्राथमिकता है, जो मेरा वर्तमान है : — मैं क्यूँ नहीं ! उस पर अपना ध्यान केन्द्रित करूँ ???

ऐसा सोचकर ……. उसने अपना पूरा ध्यान, अपने नव आगंतुक को जन्म देने की ओर केन्द्रित किया !
फिर जो हुआ वो आश्चर्य जनक था !!!

     कड़कड़ाती बिजली की चमक से, शिकारी की आँखों के सामने अँधेरा छा गया, और उसके हाथों से तीर चल गया और सीधे भूखे शेर को जा लगा !  बादलों से तेज वर्षा होने लगी और जंगल की आग धीरे-धीरे बुझ गयी !
इन सबके बीच, हिरणी ने एक स्वस्थ शावक को जन्म दिया !

दोस्तो,

     ऐसा ही तो, हमारे साथ भी होता है ! जब हम चारों ओर से समस्याओं से घिर जाते है,  नकारात्मक विचार हमारे दिल – दिमाग को बुरी तरह से जकड़ लेते हैं, मुसीबतों से बाहर निकलने की दूर-दूर तक कोई संभावना, नजर ही नहीं आती !

     उस समय कुछ विचार बहुत ही नकारात्मक होते है,  जो हमें चिंता-ग्रस्त कर कुछ भी सोचने-समझने लायक ही नहीं छोड़ते !

हम परेशान / दु:खी हो जाते हैं और सोचते हैं :—

  • ये सब मेरे साथ ही क्यूँ हो रहा है ???
  • क्या मेरा जन्म, मुसीबतों में ही पड़े रहने को हुआ है ???
  • क्या संसार के सारे दुःख, तकलीफ मेरे ही नसीब में हैं ???
  • क्या मुझे खुश रहने का कोई अधिकार ही नहीं है ???

ऐसे समय में कुछ भी समझ नहीं आता कि, क्या उचित है और क्या अनुचित ???

     दिल – दिमाग काम करना बंद कर देता है ……. और हर वक़्त यही सवाल चलता रहता है……….

     कि क्या करें और क्या न करें ???

     अजीब दुविधा होती है !!!

ऐसे समय में, हमें उस हिरणी से यह शिक्षा मिलती है कि, हमें अपनी प्राथमिकता की ओर देखना चाहिए,  और उसी के अनुरूप अपने जीवन की दिशा और दशा तय करनी चाहिए !

     जिस प्रकार हिरणी ने सभी नकारात्मक परिस्तिथियाँ उत्पन्न होने पर भी, अपनी प्राथमिकता "प्रसव "पर ध्यान केन्द्रित किया, जो उसकी पहली प्राथमिकता थी ! बाकी तो मौत या जिन्दगी कुछ भी उसके हाथ मे था ही नहीं, (जिन पर उसका कोई अधिकार ही नहीं था) और उसकी कोई भी क्रिया या प्रतिक्रिया उसकी और गर्भस्थ बच्चे की जान ले सकती थी !

     ऐसे संकट-पूर्ण समय में, उसने केवल और केवल अपनी प्राथमिकता तय की और उसी अनुरूप कार्य किया और देखते ही देखते सभी परिस्थितियां सामान्य हो गयी ! उसी प्रकार हमें भी अपनी प्राथमिकता तय करके, उसी के अनुसार अपने जीवन को आगे बढ़ाना चाहिए !

दोस्तो,

     समय और हालात कैसे भी, क्यूँ न हो…….

  • यह आपका कर्त्तव्य है, कि आप किसी भी परिस्थिति में अपना धैर्य न खोएं !
  • आप शांत स्वभाव से अपनी प्राथमिकता (Priority) तय करें और उसी के अनुरूप अपनी पूरी ऊर्जा के साथ अपना कार्य करें !
  • इस अनमोल जीवन में, अपने लिए एक लक्ष्य तय करें और उसकी पूर्ति हेतु अपनी पूरी ऊर्जा और पूरा ध्यान (Focus) केन्द्रित करें !
  •  आप उन कार्यों को करें, जिन पर आपका अधिकार है, न कि उन कामों में अपना समय और ऊर्जा नष्ट करें जिन पर आपका कोई अधिकार ही नहीं !
  • भूत और भविष्य की परवाह न करते हुए, वर्तमान में जीयें !
  • लोगों की आलोचनाओं की चिंता न करते हुए, केवल और केवल अपनी लक्ष्य सिद्धि की ओर बढ़ना चाहिए !

दोस्तो,

    बात थोड़ी कडवी है……किन्तु सत्य है !

   जितनी जल्दी हो सके, हमें इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि……

  • जब तक हमारी जिंदगी है, इसमें उतार-चढ़ाव आयेंगे ही !
  • कभी सुख, तो कभी दुःख !
  • कभी अच्छे दिन तो कभी बुरे दिन !
  • कभी संपत्ति तो कभी विपत्ति !
  • कभी समस्याओं का अँधेरा तो कभी समाधान और खुशहाली का उजाला
  • कभी ग़मों का मकड़-जाल तो कभी खुशियों की बारिश 

दोस्तो,

       जितनी जल्दी हो सके, अपने जीवन की प्राथमिकतायें तय करें और उसी के अनुसार जीवन को एक नयी दिशा दें !

       तो आइये ! एक नयी शुरुआत करें और प्राथमिकताओं की मजबूत आधारशिला पर, एक स्वस्थ, सुखी, समृध्द और शानदार जीवन रुपी भवन का निर्माण करें !

 ( This story is inspired from Acharya Balkrishna ji blog )

 

जीवन के हर क्षेत्र में आपकी सफलता का आकांक्षी……..

आपका अपना मित्र 

प्रणव भारद्वाज 

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धन्यवाद!!!

 

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1 Comment on सफलता  का  आधार

मधुर नागवान said : Guest Report 10 months ago

बहुत ही सकारात्मक और प्रेरक

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