PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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क्या हम, आज़ाद हैं ???

By on August 12th, 2016

 

क्या हम, आज़ाद हैं ???

 

दोस्तो,

      अभी कुछ दिन बाद हमारा पावन पर्व, स्वतंत्रता दिवस 15th August आने को है ! उस दिन हम अपने देश की आज़ादी की 70 वी वर्ष-गाँठ मनाएँगे ! हर तरफ बाज़ारों में, स्कूलों में, राष्ट्र भक्ति के मधुर गीत सुनाई देंगे ! टीवी पर, Malls में, जहाँ भी नजर जाएगी राष्ट्र भक्ति का अद्भुत नजारा नजर आएगा !

      लालकिले की प्राचीर से हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी, देश को आज़ादी की शुभकामनायें देंगे ! SOCIAL – MEDIA, इन्टरनेट, फ़ोन सभी तरफ आज़ादी की शुभकामनायें दी जाएंगी !

      कुल मिला कर, हम देश-वासियों को यह बताने की पूरी कोशिश की जाएगी, कि भाइयो / बहनों —– आप आज़ाद हो गये हैं ! आप सभी लोग आज़ाद देश के वाशिंदे हो ! मन में भी आता है — जब सभी लोग कह रहे हैं, तो यह सच ही होगा कि हम आज़ाद हो गये ! हमारा देश आज़ाद हो गया !

  लेकिन फिर अंतर्मन से यह सवाल उठता है —- कि, क्या हम या हमारा देश सच्चे अर्थों में आज़ाद हो गया है ??? क्या वाकई ……….

  • क्या जिस आज़ाद भारत में हम लोग रह रहे हैं…….. क्या यह वही आज़ाद भारत है जिसको पाने के लिए हमारे अपने महान लोगों ने अपनी जान की आहुति दी थी ?
  • क्या यह वही भारत है, जिसके लिए हमारे महान क्रांतिकारियों ने हँसते-हँसते, फांसी का फंदा चूमा था ?
  • क्या हम अपने शहीदों को, उनके सपने का भारत देकर उनके प्रति सच्ची श्रधांजलि अर्पित कर रहे हैं ???

  इन यक्ष प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए, आइये कुछ बातों को समझने की कोशिश करते हैं……

 

हमारी भाषा :—-

आज के समय में यदि हम, अपनी प्यारी मातृभाषा हिंदी में बात करें…… तो  अधिकांश लोग इस तरह से देखते हैं कि, मानो हम किसी अन्य ग्रह के प्राणी हैं !

     आज ऐसा माहौल बना दिया गया है कि, ऐसा लगता है कि यदि हमें विदेशी भाषा अर्थात इंग्लिश नहीं आती, तो हमे कुछ भी नहीं आता ! हम पूरी तरह से अयोग्य हैं ! हालात यह हैं कि ….. जितना हम अपनी भाषा का अपमान करेंगे, हम उतने ही सभ्य और योग्य माने जाएंगे !

     ऐसा माना जाता था, कि भाषा — हमारी पहचान होती है ! लेकिन आज समाज में, इंग्लिश भाषा सीखने और बोलने का ऐसा भूत सवार है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना बहुत ही मुश्किल है ! इंग्लिश लोगों के दिल-दिमाग पर हावी होती चली जा रही है !

मैं ये नहीं कहता कि हमें इंग्लिश भाषा का ज्ञान नहीं होना चाहिए, लेकिन यह कहाँ तक उचित है कि इस इस विदेशी भाषा को सीखने के चक्कर में हम अपनी माँ समान  हिंदी भाषा को ही भूल जाएँ !

आज हालात यह हैं कि हिंदी भाषा को यादों में बनाए रखने के लिए, हमें हिंदी पखवाड़ा सप्ताह (सरकारी संस्थाओं में) मनाना पड़ता है ताकि 

हम लोग कहीं हिंदी को भूल ही न जाएं ! …………….. क्या यही आज़ादी है ???

 

हमारी वेश-भूषा :—-

आज समाज में, बड़ी ही विचित्र दौड़ लगी हुई है, कि ……… कौन कितना ज्यादा विदेशी दिख सकता है ! इस दौड़ में, लोगों के बदन पर कपडे कम होते चले जा रहे  हैं (विशेषकर महिला वर्ग में) ! इस अंधी दौड़ का आधार यह होता है कि, कपडे कम से कम पहने जाएं और बदन ज्यादा से ज्यादा प्रदर्शित किया जाए !

जो जितना कम कपडा पहनता है, उसे उतना ही आधुनिक और खुले विचारों का माना जाता है ! लडको को एक आजीब तरह का शौक है, फटे कपडे पहनने का — (फटी & उधडी जींस) ! पहले कम कपडे पहनना या फटे पुराने कपडे पहनना गलत माना जाता था (या उनको गरीब समझा जाता था ) लेकिन आज तो यह फैशन बन गया है !

फैशन की इस अंधी दौड़ में हम अपने संस्कारों, मर्यादाओं और शर्म-लिहाज को छोड़ दें, क्या यह उचित है ??? क्या इसी को …………. आज़ादी कहेंगे ???

 

हमारी शिक्षा  :—-

बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि….. आज के समय में जो व्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजर रही है — वो है, हमारी शिक्षा व्यवस्था !

पहले ऐसा माना जाता था कि, शिक्षा का मकसद हमें जीवन के लिए तैयार करना है,  ताकि हम एक अच्छा जीवन जी सकें और अपने देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें ! मानसिक विकास, बौद्धिक विकास, शारीरिक विकास, नैतिकता, बड़े-बुजुर्गों का मान-सम्मान, चरित्र की गरिमा, ब्रहमचर्य, देश के प्रति हमारे कर्त्तव्य, राष्ट्र-भक्ति, हमारी अच्छी सोच ——– यह सभी महत्वपूर्ण पहलु हमारी शिक्षा के आधार होते थे !

पर आज, हमारी शिक्षा …… पूरी तरह से उद्देश्य रहित हो गयी है !

आज की शिक्षा से या तो हम नौकरी हासिल कर सकते है या बेरोजगारी-भत्ता !

आज शिक्षा का केवल एक ही मकसद है कि हमारे अपने बच्चों को English का रट्टू तोता बना कर — तैयार कर देना ! आपकी English जितनी अच्छी होगी, आप उतने बेहतर तरीके से विदेशी धरती पर, विदेशी लोगों की सेवा कर पायेंगे —— अर्थात आपको विदेश में एक अच्छी नौकरी मिल जाएगी !

कितनी विचित्र बात है, बच्चे हमारे, सभी संसाधन Resoures (पैसा, स्कूल, शिक्षक, अन्य सुविधाएँ) हमारे और सेवा —- विदेश की ! अपने राष्ट्र का क्या ??? अपने लोगों का क्या ???

जबकि आज़ादी के लिए, हमारे अपने लोगों ने विदेशियों के यहाँ काम करने से, न सिर्फ इनकार कर दिया बल्कि उनको हमारे देश से भी भगा दिया !

लेकिन आज के समय में, विदेश मे नौकरी करना लोगों के लिए एक सम्मान की बात मानी जाती है !

क्या यही है आज़ादी ???

 

हमारे शिक्षक :—-

हमारी किताबों में गुरु को भगवान् से भी बढ़कर दर्जा दिया गया है ! उनको हमारे बच्चों का भाग्य-निर्माता माना गया है ! लेकिन यदि आज के दौर में देखा जाए तो क्या ऐसा कुछ प्रतीत होता है ? क्या आज एक शिक्षक की वो गरिमा है ?

हालात यह हैं, कि जो महान शिक्षक सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं, वो स्वयं भी अपने बच्चों को इन सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते !

प्रश्न उठता है क्यों……

सवाल बड़ा विचित्र है ! पर इसका उत्तर……….???

क्या यही आज़ादी है ???

 

क़ानून – व्यवस्था :—-

आज हमारी अदालतों में करोड़ों की संख्या में मुक़दमे लंबित है ! कई Cases में तो यह देखने को मिलता है कि, मुक़दमे करने वाले व्यक्ति की मृत्यु को 5 साल हो जाते हैं, तब उसके केस को सुनने का अवसर आता है ! कुछ Case में ऐसा होता है, जिनसे लगता है कि जिसके पास पैसा है, ताकत है, उसको कानून से डरने की कोई जरूरत ही नहीं है ! आज की न्याय व्यवस्था में गरीब लोगों या मध्यम वर्ग के लोगों के लिए न्याय पाना सपने देखने जैसा है ! …..क्या यही है आज़ादी ???

 

स्वास्थ्य –सुविधाएँ  :—-

हमारे देश की जो प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए, दुर्भाग्य से वो आज चर्चा का बिंदु भी नहीं है ! आज हालात बहुत खराब हैं, आज स्वास्थ्य-सुविधाओं पर किसी भी सरकार या संस्था का कोई ध्यान ही नहीं है !

अस्पताल, और डॉक्टर्स की तो मानो, जैसे परिभाषा ही बदल गयी है ! इलाज के नाम पर क्या-क्या किया जाता है……. यह किसी से छिपा नहीं है ! आज के समय में अच्छा इलाज पाना, मानो कोई सपना सच होने जैसा है !……… यही है आज़ादी ???

 

हमारे नेता  :—

इस बारे में आप सभी, मुझसे अच्छी जानकारी रखते हैं …..फिर भी यदि आपके मन में कोई शंका हो तो, आप किसी भी दिन लोकसभा या राज्य सभा की कार्यवाही देख  सकते हैं और यह जान सकते हैं की नेता लोग हमारे देश के विकास में अपना कितना  अमूल्य और कीमती योगदान अर्पित करते हैं ???

आज भी चुनाव बिजली, पानी, सड़क, गरीबी, अशिक्षा, जाति, आरक्षण, भष्टाचार के नाम पर ही लडे जाते हैं !

…… यही है आज़ादी ???

 

हमारी विरासत :—-

आज हमारी नदियाँ गटर के गंदे नालों में तब्दील हो गयी हैं ! हमारी वैदिक भाषा संस्कृत को पढने में लोगों को समय की बर्बादी नजर आती हैं !

 

सुरक्षा-व्यवस्था  :—-

आज के समय, यदि आप स्वयं की सुरक्षा कर सकते है तो सबसे अच्छा है ……. इसके विपरीत यदि आप किसी संस्था या सरकार से इसकी उपेक्षा करते हैं तो अपनी गलतफहमी जितनी जल्दी हो सके दूर करने में ही फायदा है !

आज के समय में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान एक चुनौती बन गया है !

क्या यही है……

 

सामाजिक ताना–बाना :—–

आज हमारी दुनिया मैं, मेरी पत्नी और मेरे बच्चे पर सिमट कर रह गयी है ! परिवार बिखरते जा रहे हैं ! हम धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी की दुनिया में समाते जा रहे हैं (facebook, whats up) और अपनों से दूर होते जा रहे हैं !

वृद्धाश्रम — हमारे माता-पिता का नया पता बनते जा रहे हैं ! समाज में आपसी प्रेम-भाव कम होता जा रहा है ! हम दिन प्रति दिन देश के प्रति अपने कर्तव्यों को भुलाते चले जा रहे हैं ! ……….क्या यही है आजादी !

अगर साफ़ शब्दों में कहा जाए, तो आज के हालात यह हैं कि यदि किसी व्यक्ति के पास पैसा है, सत्ता की ताकत है —– तो उसे किसी कानून, किसी संस्था या किसी से भी डरने की जरूरत नहीं ! वो जो चाहे, वो कर सकता है, बोल सकता है —– इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो कार्य/ उसके बोल —-  गलत है या सही !

नैतिकता का तो कोई मतलब ही नहीं रह गया है !

और रही बात गरीब व्यक्ति या मध्यम वर्ग की ………. उसकी स्थिति के बारे में जो न कहा जाए, वो ही कम है !

 

दोस्तो…….

अब, आप  क्या कहोगे आप ……  क्या यही है असली आज़ादी ???

 

समाधान 

दोस्तो,

यह देश हमारा है, और इससे भी बड़ी बात यह हमें अपने प्राणों से प्यारा है !

तो, इसमें व्याप्त मुश्किलों को दूर करना और इसे अपने सपनों का आज़ाद भारत बनाने का अधिकार भी हमारा है !

हमारे लिए यह बेहतर होगा कि, हम यह न सोचें कि वो मनचाहा बदलाव हमारे नेता लायेंगे, या अचानक से कोई चमत्कार होगा ! अब समय बड़ी-बड़ी बातें बनाने का नहीं, बल्कि अपने स्तर से बदलाव की शुरुआत करने का है !

दोस्तो,

देश को महान बनाने के लिए, हमें कुछ भी अलग से करने की जरूरत नहीं ! हमें केवल इतना करना है कि, हम जो भी काम करें, तो अपने मन में यह भाव रखें कि, मैं यह काम अपने देश के लिए कर रहा हूँ, मेरा यह काम मेरे देश को समर्पित है ! इस काम को मैं बेहतर से बेहतर तरह से करूँगा !

हम सबसे ऊपर अपने देश को रखें और पूरी निष्ठा से अपना काम करें !

यदि आप और हम इसी सोच के साथ आगे बढेंगे तो हम कभी भी कोई गलत काम / वर्ताव नहीं करेंगे और धीरे-धीरे अपने सपनों का भारत बनाने में कामयाब हो जाएंगे !

दोस्तो,

मन में यह सवाल आएगा की हमारे बदलने से क्या होगा…… लोग तो नहीं बदलेंगे !

यदि ऐसा ही हमारे महान क्रांतिकारी सोचते तो क्या वो कभी देश पर कुर्बान होते ???

दोस्तो,

हमारे यहाँ पीछे चलने वालों की कमी नहीं है, जरूरत है तो सच्चे और वीर नायकों की………..

 

तो आइये ! इस बदलाव का हिस्सा हम स्वयं बनें, बदलाव की शुरुआत हम स्वयं से करें….

क्यूंकि………

हम बदलेंगे…….तभी हमारा देश बदलेगा……..और वैसा बनेगा…… जैसा हम चाहते हैं !

 

तभी, हम यह कह पायेंगे…….कि 

smiley  अब मैं और मेरा महान देश,,,,,,,,,,,,, आज़ाद है, आज़ाद है, आज़ाद है !!!  smiley

 

जय हिन्द ! जय भारत !!

आपका अपना मित्र

प्रणव भारद्वाज


खुला आमंत्रण


दोस्तो,
       यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  Motivational Story, Article, कविता, Idea, Essay, Real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों )…………..

      जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

      तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

      पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।

धन्यवाद !!!

 

 

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1 Comment on क्या हम, आज़ाद हैं ???

मधुर नागवान said : Guest Report 10 months ago

भारत में किसी भी सुधार की विफलता का एक बहुत बड़ा कारण है कि हर व्यक्ति दूसरों से सुधार की उम्मीद करता है। स्वयं नहीं सुधरना चाहता। यदि प्रत्येक व्यक्ति आत्मावलोकन करके आत्म सुधार का प्रयास करे तो अधिकांश समस्या समाप्त हो जाएँगी।

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