PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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Maan Ki BaatSelf Improvment

थोड़ा ठहरो, तो सही !!!

By on July 20th, 2016

 

थोड़ा ठहरो, तो सही !!!

 

     रोहन (काल्पनिक नाम) एक Building Construction Company में सुपरवाइजर (Supervisor) का काम करता था ! काम के सिलसिले में, अक्सर ही उसे काफी मंजिल चढ़ना और उतरना होता था ! वो पूरे आनंद और ईमानदारी के साथ अपना काम करता था !

     एक दिन रोहन, किसी काम के सिलसिले में 9th floor (मंजिल) पर था ! वहां किसी काम को पूरा कराने के लिए, उसे एक मजदूर की आवश्यकता थी ! उसने देखा कि एक मजदूर ground floor पर काम कर रहा है ! रोहन ने उस मजदूर को आवाज दी, पर construction site पर बहुत अधिक शोर होने के कारण, मजदूर उसकी आवाज नहीं सुन पा रहा था !

     रोहन ने मजदूर का ध्यान, अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए एक 10 रूपए का नोट गिराया ! नोट मजदूर के सामने गिरा ! मजदूर ने चुप-चाप उस नोट को उठाया और अपने काम में लग गया ! अबकी बार, रोहन ने एक 100 रुपये का नोट गिराया ! नोट इस बार भी मजदूर के आस-पास गिरा ! मजदूर ने नोट अपनी जेब में रखा और अपना काम करने लगा !

     रोहन बहुत परेशान हो गया ! इस बार उसने हिम्मत करके, एक 500 रुपये का नोट गिराया ! लेकिन मजदूर ने फिर उसी तरह नोट उठाया, और बिना ऊपर देखे ही अपने काम में लग गया ! रोहन से अब रहा न गया ! इस बार उसने एक छोटा सा कंकड़ उठाया और मजदूर की तरफ उछाला ! कंकड़ सीधा मजदूर के सर पर लगा, मजदूर ने ऊपर की तरफ देखा और रोहन से बात की !

दोस्तो,

     कुछ ऐसा ही तो, हमारे साथ भी होता है ! परम–पिता–परमेश्वर, हमसे बात करना चाहता है ! वो चाहता है, कि हम थोडा ठहरें और कम से कम कुछ समय स्वयं से बात करें ! हम यह जानने की कोशिश करें कि, परमात्मा ने हमें इस धरती पर क्यूँ भेजा है ? आखिर हमारे इस अनमोल जीवन का असली मकसद क्या है ? और एक बार, जब हम अपने जीवन का मकसद पता कर लें, तब हम उसको पाने की दिशा में आगे बढ़ें………

     लेकिन हम लोग, अपनी ही धुन में लगे रहते हैं ! और बिना थके, बिना रुके इधर- उधर भागते रहते हैं !

     तब प्रभु ! हमारे जीवन में छोटी-छोटी खुशियाँ (कोई उपहार, या कुछ भी जिससे हमें ख़ुशी मिले) भेजता है, लेकिन हम चुप-चाप उनको अपने आँचल में समेट लेते हैं और फिर अपने काम में लग जाते हैं ! बिना यह सोचे, कि यह खुशियाँ हमें कहाँ से मिली हैं ?

     इसके बाद प्रभु ! हमें और बड़ी खुशियाँ ( अच्छा जीवन-साथी, अच्छी नौकरी, अपना मकान, बड़ी कार, बढ़िया increement और न जाने क्या-क्या) देता है, हम जो कुछ भी चाहते हैं, वो उनको हमें देता चला जाता है, लेकिन हमारा व्यवहार वही का वही रहता है ! हम सभी खुशियों को अपने पास रख लेते हैं और अपनी भाग-दौड़ में लग जाते हैं ! हम यह भी नहीं सोचते कि, यह खुशियाँ हमें किसने दी हैं ? हम इन खुशियों के लिए परमात्मा का आभार जाताना भी जरूरी नहीं समझते !

     हम समझते हैं, कि वाह ! हम तो बहुत सौभाग्यशाली (lucky) हैं, जो हमें इतनी ढेर  सारी खुशियाँ नसीब हुई हैं !

     हम बड़ी से बड़ी ख़ुशी को अपना भाग्य मानकर खुश हो जाते हैं ! और अपने रचयिता Creator को भूल जाते हैं ! न तो हम उसका शुक्रिया करते, और न दो पल ठहर कर इन खुशियों के लिए उसका आभार जताते !

     लेकिन जब कोई छोटा सा कंकड़ हमारे ऊपर आकर लगता है, जिसे हम problem (समस्या) कहते हैं, तब हम गिडगिडाते हुए ऊपर की तरफ देखते हैं और उससे बात करने की कोशिश करते हैं ! उसको याद करते है !

दोस्तो,

     जब हम किसी मुसीबत / परेशानी में होते हैं या किसी मुश्किल घडी में पड़ जाते हैं, तब हम विचलित हो जाते हैं ! और उस परेशानी से बाहर निकलने के लिए कभी इस मंदिर / कभी गुरुद्वारा / कभी किसी पूजनीय धार्मिक स्थल के चक्कर लगाते हैं !

     उस मुश्किल समय में, हम परम-पिता-परमात्मा से एक ही प्रार्थना करते हैं कि, हे प्रभु ! मुझे कैसे भी, इस परेशानी या मुसीबत से निकाल ले ! आगे से जो तू कहेगा, जैसा तू कहेगा, मैं तेरी हर बात मानूंगा ! पर इस बार, कैसे भी मेरी यह मुसीबत हल कर दे !

     हम बेचैन हो जाते हैं, परेशान हो जाते है…… परमात्मा से बात करने के लिए ! बस एक ही चाह होती है, एक ही इच्छा होती है कि कैसे भी परमात्मा मेरी बात सुन ले ! मेरी प्रार्थना स्वीकार कर ले ! लेकिन एक बार, जैसे ही हम उस मुसीबत से निकले, फिर हमारा रवैया वैसा ही हो जाता है – जैसा पहले था !

दोस्तो,

     आपने एक कहावत तो, सुनी ही होगी…….

 

दुःख में सुमिरन सब करें !

सुख, में करे न कोय !!

जो सुख में सुमिरन, हम करें !

तो दुःख काहे को होय !!

 

(सुनिरन का अर्थ है : याद करना )

 

     समय कैसा भी क्यों न हो ???

परिस्थितियां, कैसी भी क्यूँ न हों ???

  • यह हमारा कर्तव्य है कि, हम हर रोज कम से कम दो मिनट अपने लिए निकालें !
  • खुद से बात करें !
  • हम यह जानें कि, हमें क्या करना है ???
  • कहाँ जाना है ???
  • क्या हम, अपने लक्ष्य को पाने की दिशा में सही जा रहे हैं ???
  • हमारे जीवन की दिशा और दशा क्या है ???

     और जब भी हमें कोई ख़ुशी मिले या कोई अच्छा काम हो, तो बिना देर किये – अपने रचयिता – प्रभु का आभार जताएं, बिना इस चीज का इंतज़ार किये कि कब हमारे ऊपर पत्थर पड़ेगा / मुसीबत आयेगी !

दोस्तो,

     हमारे जीवन में जो कुछ भी है, वो बहुत बहुमूल्य है, हर चीज अनमोल है ! चाहे वो कोई रिश्ता (पति/पत्नी), (भाई–बहिन) (माँ-पापा) या अन्य कोई भी रिश्ते-नाते हों ! कोई वस्तु, कोई दोस्त, कोई उपलब्धि या कुछ भी !

     हमें हर छोटी-बड़ी चीज के लिए परमात्मा का शुक्रिया अदा करना चाहिए ! उसका अहसान-मंद होना चाहिए ! कभी भूल कर भी किसी रिश्ते / किसी मनुष्य / या किसी का भी अपमान नहीं करना चाहिए क्यूँकी हमारी जिंदगी में जो कोई भी है (चाहे छोटा या बड़ा ), वो यूँ ही नहीं है —- हर किसी का हमारी जिंदगी में एक अहम् रोल है !

दोस्तो,

     किसी चीज / वस्तु / रिश्ते / दोस्त / सगा-संबंधी / रिश्ते-नाते या मनुष्य का महत्व, तब पता चलता है, जब वो हमारे पास नहीं होता, उसकी कीमत तब पता चलती है — जब वो हमसे दूर चला जाता है !

     इससे पहले कि, हमें इस स्थिति से गुजरना पड़े, थोडा ठहरो और अपनी हर ख़ुशी के लिए परम –पिता –परमेश्वर का शुक्रिया करो, उसका अहसान मानो और अपनी जिन्दगी में आगे बढ़ो !

     हमारे पास समय ही नहीं है : —- यह रटा-रटाया गीत छोड़–कर, कम से कम दो मिनट अपने लिए निकालो, अपनों के लिए निकालो और खुद से बात करो ! स्वयं से बात करो !

 

स्वयं से बात ! मतलब परमात्मा से बात !!!

 

     क्यूंकि परम-पिता-परमेश्वर की विराट सत्ता हमारे अन्दर ही तो, विराजमान है !

 

     तो आओ, अपने रचयिता से बात करें और अपनी हर ख़ुशी (छोटी-बड़ी) के लिए ह्रदय से उसका आभार जताएं !

     ……….. जल्दी करो…..कहीं देर न हो जाए !!!

 

आपकी खुशियों का आकांक्षी

आपका अपना मित्र,

प्रणव भारद्वाज

 

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