PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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dukhon ka the end
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दुखों का : The End

By on June 10th, 2016

 

दुखों का : The End

 

   एक गाँव में खुशीराम नाम का, एक व्यापारी रहता था । उसका भरा-पूरा परिवार था । प्रभु-कृपा से वो एक साधन–सम्पन्न व्यक्ति था । उसका एक बचपन का दोस्त, जिसका नाम प्यारे–लाल था, हिमाचल में रहता था । ख़ुशी राम को सेब खाने का बहुत शौक था ।

   एक बार प्यारे-लाल ख़ुशीराम से मिलने उसके घर आया । प्यारे-लाल ने कहा, “ मित्र, हिमाचल के सेब बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं । मैं ये बात जानता हूँ, कि मेरे मित्र को सेब बहुत पसंद हैं । इसीलिए तुम्हारा ये बचपन का मित्र, तुम्हारे लिए हिमाचली सेब की पेटी लेकर आया है । उम्मीद है, तुम्हें मेरी यह भेंट अवश्य पसंद आएगी ।

   ख़ुशीराम यह सुनकर बहुत खुश हुआ । जब उसने यह बात, अपने परिवार को बताई, तो सब लोग बहुत खुश हो गये । ख़ुशी-राम ने ख़ुशी-ख़ुशी सेब की पेटी खोली ।

   पेटी से 10 / 11 सेब खराब निकले । खुशीराम को बहुत दुःख हुआ और वो उदास हो गया ।

   जो सेब खराब या कम खराब थे, ख़ुशीराम ने उनको पेटी से निकाल लिया और वाकी के सब अच्छे सेब पेटी में बंद करके रख दिए ।

   ख़ुशी राम भरे मन से, उन खराब सेब को खाता, अपने परिवार को भी खिलाता और जो भी उससे मिलने आता उनको भी खिलाता ।

दोस्तो,

   आप सोच रहे होंगे, ऐसा भी कभी होता है क्या ???

   यदि आपको ख़ुशीराम को सलाह देनी हो, तो आप कहेंगे, “ ख़ुशी राम को खराब सेब फेंक देने चाहिए, और अच्छे सेब को खुश होकर खाना चाहिए”

   यक़ीनन ख़ुशीराम का व्यवहार किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है । यहाँ ये आसानी से कहा जा सकता है कि उसके इस व्यवहार से न तो वो स्वयं ही खुश है, न ही उसके परिवार वाले और न ही उससे मिलने वाले व्यक्ति —- क्योंकि खराब सेब खाना, आखिर किस व्यक्ति को अच्छा लगता है ???

   दोस्तो,

         आपको जानकार हैरानी होगी कि, जाने अनजाने में आप भी ख़ुशीराम की तरह व्यवहार करते हैं ।

कैसे ???

  आइये, इसे समझने की कोशिश करते हैं :—-

  आप एक शानदार जिंदगी जी रहे हैं, कि तभी…….

  • आपके साथ कोई ऐसी घटना घट जाती है, जो आपको तकलीफ/ या दुःख पहुंचाती है
  • कुछ ऐसा जिसकी आपको उम्मीद नहीं होती, और जो आपको पसंद न हो
  • आपको ऐसा परिणाम मिलता है, जो आपकी अपेक्षा के अनुरूप न हो
  • कुछ भी ऐसा, जो हम सोचें कि हमारे साथ गलत हो गया
  • कोई गलत अनुभव या किसी व्यक्ति का आपके प्रति गलत व्यवहार

  उस समय हम क्या करते हैं ???

  हम अपने साथ हुए गलत अनुभव या व्यवहार या घटना को अपने ह्रदय से लगा लेते हैं । हम पल प्रति-पल यह सोचते हैं कि यह हमारे साथ ही क्यूँ हुआ ??? हम उदास हो जाते हैं । उस समय हम अपने साथ हुई हर अच्छी चीज को भूल जाते हैं ।

  कभी हम, अपने आप को दोष देते हैं, कभी परिस्थितियों को, और हर वक़्त उसी परेशानी / गलत अनुभव / गलत परिणाम के बारे में सोच-सोच कर परेशान होते रहते हैं ।

  हम यह जानते हैं, कि हमारा ऐसा सोचना हमें दुःख के अलावा और कुछ न देगा लेकिन फिर भी हम सोचते हैं, इतना ही नहीं हम अपनी इस परेशानी को अपने परिचित लोगों को भी बताते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि वो हमसे सहानुभूति जताए ।

  यहाँ हमारा व्यवहार ख़ुशीराम की तरह नहीं है ???

ख़ुशी राम

हम लोग

 पेटी से खराब सेब निकाल लेता है और स्वयं खाता है

  अपने जीवन के कडुवे अनुभव / गलत घटना को अपने ह्रदय में बसा लेते हैं और बार-बार उसको सोचकर परेशान होते हैं

       खराब सेब परिवार को खिलाता है

  हमें परेशान देखकर हमारे घर के लोग भी परेशान हो जाते हैं

   खराब सेब, मित्र और परिचितों को भी खिलाता है

  हम लोग भी अपनी परेशानी को मित्रो और परिचितों से share करते हैं और वो भी दुखी हो जाते हैं

   अच्छे सेब पेटी में बंद करके रख देता है

  हम लोग भी अपनी जिंदगी के हर अच्छी चीज को भूल जाते हैं और जो गलत हो गया है उसी के बारे में सोचते रहते हैं

   दोस्तो,

      समय बहुत परिवर्तन-शील है । यह हमेशा, एक समान नहीं रहता । आने वाले पल में क्या होगा ??? यह कोई नहीं जानता । परेशानी किसी के साथ भी, और कभी भी हो सकती है । कोई भी बुरा अनुभव / गलत घटना / अनुचित परिणाम को भूलना आसान नहीं होता लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं कि आप अपने जीवन से ही निराश हो जाएँ ।

     आप अपने जीवन की हर अच्छाई / हर अच्छी चीज को भूल जाएँ और केवल बुरे अनुभव को ही याद रखें । आप इन गलत अनुभव को सोच-सोच कर स्वयं परेशान रहें और इस दुःख को पूरी तरह स्वयं पर और अपने परिवार पर हावी हो जाने दें ।

 

समाधान

 

दोस्तो,

   आपका दुःख या तकलीफ कितनी भी बड़ी क्यूँ न हो, पर आपको इस बात को याद रखना होगा कि सूर्यास्त के बाद सूर्योदय होता है । ऐसे ही हर दुःख के बाद सुख भी अवश्य आएगा ।

   आपको स्वयं ही अपने दु:खों / परेशानी से लड़ना होगा । अपने आप को बेसहारा या असहाय न बनने दें बल्कि स्वयं के सबसे बड़े मित्र बनें ।

   यदि आप हर वक़्त अपने दु:खों के बारे में सोचोगे, तो आप कहीं न कहीं अपने दुखों को बढ़ाते ही चले जाओगे इसके विपरीत यदि   आप इस तरह से सोचोगे कि, “मैं सर्व-शक्तिमान परम पिता परमेश्वर की संतान हूँ, मेरा जन्म दुखी रहने या कीड़े-मकोड़े वाली जिंदगी जीने के लिए नहीं हुआ है । मैं भी हर वो चीज पाने का अधिकारी हूँ, जो मैं पाना चाहता हूँ । अपने इसी आत्म-विश्वास के साथ आगे आइये और दुखों को अपनी तरफ से चुनौती दीजिए ।

   मुझे पूरा यकीन है कि जीत आपकी ही होगी और आप एक शानदार और जिंदादिल जिंदगी के मालिक बनेंगे ।

   किसी भी परेशानी या अनुभव से शिक्षा लें, सबक लें ताकि वो परेशानी आपके जीवन में दोबारा न आ सके और आप अपने जीवन का अननद ले सकें ।

दोस्तों,

   यह जीवन आपका है, पूरी तरह से आपका अपना और यह आपको ही तय करना है कि आपको इस अनमोल जीवन को कैसे जीना है ???

 

आपके बेहतर आज और बेहतरीन कल का आकांक्षी 

आपका अपना दोस्त 

प्रणव भारद्वाज 


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो,
       यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  Motivational Story, Article, कविता, Idea, Essay, Real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों )…………..

      जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

      तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

      पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।

धन्यवाद!!!

 

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4 Comments on दुखों का : The End

Ashish sharma said : Guest Report one year ago

Very nice story,

Reshu sharma said : Guest Report one year ago

Very inspired. .. artical ... very nice

rahulmittal said : Guest Report one year ago

Bhut hi faduu chij h yeh according to going write way. .

Atul said : Guest Report one year ago

Nice Post.....

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