PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

Read More....

bahaane
Maan Ki BaatSelf Improvment

बहानों को कहिये ………bye – bye 

By on June 6th, 2016

 

बहानों को कहिये ………bye – bye 

 

      राहुल (काल्पनिक नाम) गर्मियों की छुट्टियों में अपने नाना के घर गया । राहुल बहुत खुश था, पर एक दिन अचानक वो जिद करने लगा ।

राहुल अपने नाना से बोला कि, “ नाना आज मेरा मन, मिर्च खाने का है”

      नाना उसे बहुत प्यार करते थे, और उसकी हर जिद पूरी करते थे । नाना ने उसे समझाते हुए कहा, “ बेटा, मिर्च बहुत तीखी होती है । मिर्च खाने से आपको बहुत तकलीफ होगी, तो क्यूँ न आप कुछ और खा लो । आप जो कहोगे, मैं वो खिलाऊंगा ।  लेकिन राहुल ने जिद पकड़ ली, वो बोला की आज मुझे मिर्च ही खानी है ।

      घर के सब लोग परेशान हो गये । सभी ने राहुल को बहुत समझाया पर राहुल एक ही जिद थी कि आज मुझे मिर्च ही खानी है ।

राहुल की जिद पर मिर्च मंगवाई गयी । मिर्च को प्लेट में रखकर राहुल को खाने के लिए बोला गया ।     

राहुल बोला, नहीं ये वाली नहीं, मुझे तो लाल मिर्च खानी है ।

     अब लाल मिर्च मंगवाई गयी, और खाने को बोला गया ।

राहुल मचल गया, वो बोला आप समझे नहीं, मुझे तो तली हुई मिर्च खानी है ।

मिर्च को तलवाया गया और राहुल को बोला गया, “ अब चुप-चाप मिर्च खा लो, और कोई फरमाइश अब नहीं चलेगी ।

      राहुल ने एक बार फिर गुलाटी मारी और बोला मैं तो छोटा बच्चा हूँ । मैं पूरी मिर्च कैसे खा सकता हूँ ??? मैं तो आधी मिर्च खाऊंगा । नाना को बहुत गुस्सा आई, लेकिन बच्चे की जिद के आगे झुकते हुए उन्होंने मिर्च के दो टुकड़े किये और राहुल को डांटते हुए बोले अब कोई शिकायत नहीं चाहिए, लो अब खा लो आधी मिर्च ।

इस पर राहुल बोला, “ पहले आप खाओ, तभी मैं खाऊंगा । नाना बहुत परेशान, पर जैसे-तैसे उन्होंने आधी मिर्च खा ली ।

      जैसे ही नाना ने मिर्च खायी राहुल ने जोर से रोना शुरू कर दिया, “ मुझे जो मिर्च खानी थी वो तो नाना ने खा ली, अब मैं क्या खाऊंगा ???

नाना ने अपनी धोती संभाली और वहां से भाग गये ।

दोस्तो,

       ये हमारे देश का दुर्भाग्य है, कि आज कल ऐसे लोगों की संख्या बढती जा रही है ।

ऐसे लोग :—–

  • जिनकी फरमाईशों की लिस्ट आसमान से ऊंचीं है
  • जो हर वक्त कुछ न कुछ नया चाहते हैं
  • जिनको हर किसी से कुछ न कुछ शिकायत है : परिवार से, समाज से, system से, सरकार से, देश से यहाँ तक की खुद से भी
  • जो ये सोचते हैं कि यदि वो देश के प्रधान-मंत्री बन गये, तो ऐसा कर देंगे वैसा कर देंगे
  • जो केवल और केवल अधिकारों की बात करते है : कर्तव्यों से इनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता
  • जो एक काल्पनिक दुनिया में जीते हैं
  • जो केवल और केवल अपने लिए जीते हैं और अपने आराम को प्राथमिकता देते हैं
  • जो यह मानते हैं, कि हर समय वो ही सही हैं और कोई भी नहीं
  • जिनका केवल एक ही काम है : कोई भी काम नहीं करना और यदि कोई काम करना भी पड़े तो नए – नए बहाने बनाना, ताकि वो यह दिखा सकें की हम तो काम करना चाहते हैं पर परिस्थितियां ही कुछ ऐसी हैं, कि हम काम नहीं कर सकते
  • अपनी हर नाकामयाबी के लिए किसी अन्य व्यक्ति, परिस्थिति को दोषी ठहराना

     हम यह कह सकते हैं, कि ये ऐसे लोग होते हैं, जिन्दगी भर कुछ काम नहीं करते  पर शोर ऐसे मचाते है कि जैसे दुनिया के सभी कार्य, वो ही कर रहे हैं । वो यह मानते है कि उनका जन्म लेना इस दुनिया पर किसी उपकार से कम नहीं है और वो ही इस दुनिया को चला रहे हैं ।

     हैरानी कि बात यह है कि, आपको ऐसे लोग हर उम्र में मिल जाएँगे, जिनका केवल एक ही काम है हर रोज एक नए बहाने बनाना क्योंकि बहाने बनाना दुनिया का सबसे आसान काम है ।

और यूँ ही शिकायत और नए नए बहाने बनाकर अपनी पूरी जिंदगी बिता देते हैं ।

दुःख की बात यह है की इस तरह के लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है ।

दोस्तो,

   इससे अलग एक और तरीका है, जीवन जीने का…….

   यह सच है, कि हमें विरासत में उतना कुछ नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए था ।

   समाज में, देश में बहुत तरह की बुराइयाँ हैं, लेकिन यदि हम ध्यान से देखें तो बहुत अच्छाई भी हैं ।

   तो क्यूँ न हम अच्छाइयों को आगे बढ़ाएं और बुराइयों को ख़तम करने में अपनी एक जिम्मेदार भूमिका निभाएं । 

हम यह क्यूँ सोचें कि, हमें विरासत में क्या मिला है ???

इसकी जगह हम यह क्यों न सोचें कि, “ हम विरासत अपने देश को क्या देंगे ???

 

   कोई भी देश खुद व खुद महान या अच्छा नहीं बन जाता । उसके देशवासी ही उसे महान या अच्छा बनाते हैं ।

   इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है : जापान

   आपको पता होगा, विश्व-युद्ध में अमेरिका ने, अपने परमाणु बम द्वारा जापान को पूरी तरह तबाह कर दिया था (हिरोशिमा-नागाशाकी) । लेकिन जापान के लोगों ने अपने देश को फिर से महान बना दिया और आज technology में पूरा विश्व, जापान का लोग मानता है ।

    आप कल्पना करो यदि जापान के लोग भी यह सोचते कि हमें देश ने क्या दिया है ? तो क्या आज जापान वैसा होता जैसा आज है ???

नहीं ……….कभी भी नहीं ।

    उन्होंने बहाने बनाने या शिकायत करने में अपना समय नहीं गंवाया और अपने देश को महान बनाने में अपनी महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभाई ।

दोस्तो,

   अब यह आपको तय करना है कि आपको अपना जीवन बहाने बनाने / शिकायत करने में गुजारना है या देश के विकास में अपनी उपयोगी और प्रभावी भूमिका निभाने में ।

    तो आइये, खुद से एक छोटी सी शुरुआत करें ……….

    हम जो भी काम करें, वो यह सोचकर करें कि मैं अपने देश के लिये काम कर रहा/रही  हूँ । यह देश मेरा है और इस देश को आगे बढाने में मुझे जो कुछ भी करना हो, वो मैं करूँगा ।

दोस्तो,

    यदि हम इस सोच के साथ आगे बढ़ेंगे, तो हम एक तरफ अपने काम को बेहतर तरीके से कर पायेंगे और दूसरी तरफ अपने देश को महान बनायेंगे ।

तो आइये,

आज से बहानों को कहिये  : अलविदा !!!

 

    और अपने देश को महान देश बनाने में अपनी जिम्मेदार और प्रभावी भूमिका निभायें ।

 

आपके बेहतर आज और बेहतरीन कल का आकांक्षी 

आपका अपना दोस्त 

प्रणव भारद्वाज 


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो,
       यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  Motivational Story, Article, कविता, Idea, Essay, Real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों )…………..

      जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

      तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

      पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।

धन्यवाद!!!

TAGS
RELATED POSTS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked