PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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18.03.16
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Shikayat v/s Koshish

By on March 18th, 2016

शिकायत V/S कोशिश

 

दोस्तो,

      अगर हम समाज में देखें, तो हमें अधिकांश लोगों के चेहरे ऐसे नजर आयेंगे जिनका मुस्कान से दूर-दूर तक कोई वास्ता ही नहीं है । ऐसा लगता है, जैसे कि उन लोगों की  मुस्कुराहट/ख़ुशी के साथ कोई खान-दानी दुश्मनी हो । उनके चेहरे मुरझाये हुए/बुझे- बुझे से लगते हैं । यदि आप उनसे बात करोगे, तो उनकी बातों से गहरी निराशा  झलकेगी । उनसे बात करके ऐसा लगेगा कि जिंदगी/जीवन जीना वाकई में बहुत ही  कठिन काम है । उनके कंधे एक हारे हुए सिपाही की तरह झुके हुए होंगे, उनकी बातों में न कोई नयापन होगा और न ही कोई ख़ुशी होगी । ऐसा लगता है, जैसे कि वो दुनिया के सबसे दुखी इंसान हैं । उनमें न तो कोई उत्साह होगा, न उमंग और न ही जीवन के प्रति कोई ख़ुशी । उनके पास केवल और केवल एक चीज होगी …… शिकायत ! शिकायत ! और शिकायत !

      आपको ऐसा लगेगा कि, उनसे बात करके आपने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया हो ।

आपका सवाल : भाई! जिंदगी कैसी चल रही है?

उन लोगों के जबाब : कट रही है ।

थोड़ी तो कट ही गयी है, और थोड़ी ऐसे ही कट जाएगी ।

अरे भाई क्या पूछते हो ? जिंदगी तो अमीर लोगों की होती है, हमारा क्या है? बस यूँ ही टाइम पास कर रहे हैं ।

     और वो अपनी शिकायतों से भरी कहानी सुनाने लगते हैं । अपनी असफलता के लिए, कभी वो अपने आप को कोसते हैं, कभी अपनी परिस्थितियों को, तो  कभी अपने Employer (जिसके यहाँ वो नौकरी करते हैं) पर गुस्सा करते हैं । कभी अपने परिवार के लोगों की कमियां निकालते हैं । कभी समाज को अपनी हालात के लिए दोषी बताते हैं, और कभी अपने देश की परिस्थितियों को अपनी असफलता का दोषी ठहराते हैं ।  

वो कहते हैं……

यदि मेरे परिवार ने मेरे लिए ऐसा किया होता !  तो आज………….

यदि मेरा जन्म अमेरिका में होता ! तो आज……….

यदि हमारे देश की सरकार ऐसा कर दे ! तो मैं……..

दोस्तो,

उनकी बातों से पता चलता है की वो, हर पल डर/चिंता के साये में अपना जीवन बिताते हैं? वो सोचते हैं.. कि  यदि मेरी नौकरी छूट गयी तो क्या होगा ? यदि ऐसा हो गया तो?

यदि वैसा हो गया तो? यदि मेरे साथ कुछ गलत हो गया तो?

वो अपने वर्तमान से खुश नहीं रहते, उनमें से कुछ लोग चाहते तो हैं कि बदलाव हो ! पर पहल करने से डरते हैं । और यूँ ही डर में अपनी पूरी जिंदगी गुजार देते हैं ।

दोस्तों,

    उनके इस डर की भारी कीमत उनके परिवार को और पूरे समाज को चुकानी पड़ती है ।  वो अपनी जिंदगी में कुछ अच्छा या नया नहीं कर पाते और इस बात का दुःख/अफ़सोस उन्हें अन्दर ही अन्दर परेशान करता रहता हैं । वो अक्सर अपने बच्चों में अपना भविष्य देखते हैं । वो ये सोचते/चाहते हैं कि जो वह न कर पाए अब वो काम उनके बच्चे करेंगे । और अपनी इसी चाहत को पूरा करने का बच्चों पर भारी दबाब बनाते है, जिससे बच्चों का वर्त्तमान और भविष्य संकट में आ जाता हैं । और इस तरह से वो अपनी उलझनों को और बढ़ा  लेते हैं ।

दोस्तों,

ऐसा लगता है, कि उनका जीवन केवल और केवल शिकायत करने के लिए ही हुआ है।   

    अगर संक्षेप में कहा जाए तो ऐसा लगता है कि वो लोग पूरी तरह से अपने-आप से और अपनी जिंदगी से नाखुश होते हैं । यदि प्रतिशत की बात की जाये तो ऐसे लोगों की संख्या 70% से 80% तक होती है और ये बहुत हैरानी और दुःख की बात है की यह संख्या दिन प्रति दिन बहुत तेजी से आगे बढती जा रही है ।

दोस्तो,

यहाँ प्रश्न यह उठता है कि “ क्या इसी को जीवन कहते हैं???

ऐसा क्या है? कि  जीवन जो इतना खुबसूरत है  ! इतना अनुपम है ! जिसको शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता, वो खूबसूरत जीवन इन लोगों के लिए एक बुरा सपना बन गया है………..और ये लोग चाहते हैं, कि चाहे कैसे भी हो पर ये समय कट जाए, यह जीवन गुजर जाए???

क्यों वो लोग अपना जीवन जीने के बजाय अपना जीवन काट रहे हैं???

क्यों वो जीवन का आनंद नहीं ले पा रहे ???

आखिर क्यों???

समाधान

दोस्तों ,

सबसे पहले शिकायत करना छोडिये

क्यूंकि…………

शिकायत करने वाला रहे, वहीँ का वहीँ !

मेहनत/कोशिश करने वाला पंहुचे, कहीं का कहीं !!

दोस्तों,

पूरी जिंदगी यह सोचते रहें कि कुछ करना है पर कुछ कर न पाएं ! और अपनी पूरी जिंदगी यूँ ही शिकायतों में गुजार दें ! इससे बेहतर है कि जो करना चाहते हैं, उसको पाने की दिशा में सार्थक कोशिश क्यों न करें? और यकीन रखिये की यदि आप कोशिश करोगे तो परिणाम अच्छा ही मिलेगा । शुरू में कठिनाइयाँ आएगी ! हो सकता है कि आपकी आलोचना भी हो ! आपका अपना परिवार या समाज आपका साथ न दे, पर आप डरें नहीं, धैर्य न खोएं और पूरे साहस और हिम्मत के साथ कदम बढ़ाएं ।

यदि आप एक कदम बढ़ाएंगे तो यकीन मानिये आपकी सफलता भी आपकी दुगुनी गति से आपकी ओर दौड़ी चली आएगी । और आप जल्दी ही अपनी मंजिल को पा लेंगे ।

दोस्तों,

शिकायत और कोशिश में क्या अंतर होता है? आइये इसे एक उदाहरण से समझते हैं……………..

(यह कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है)

एक व्यक्ति ने M.C.A किया और वो एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करने लगा ।

पर वो अपनी जिंदगी से खुश नहीं था । उसका सपना था, कि शहर में उसका खुद का अपना एक Restaurant हो, जहाँ वो लोगों को अच्छे से अच्छा खाना खिला सके ।

पर डर इस बात का था कि  लोग क्या कहेंगे ? घरवाले क्या कहेंगे? जब Restaurant ही खोलना था, तो इतनी पढाई क्यों???

उसके सामने काफी कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियां थी । पर उसने सोच लिया की Result चाहे जो भी हो पर वह कोशिश जरूर करेगा । वो कोई शिकायत नहीं करेगा, वो करेगा तो केवल और केवल कोशिश । चाहे कुछ भी हो जाए वो अपने  सपने को साकार करके ही दम लेगा ।

 …उसने सही से पूरी योजना बनायीं और उस पर काम शुरू कर दिया ।

उसने सबसे पहले एक छोटी सी दुकान किराये पर ली और काम शुरू कर दिया ।

लोगो ने उसकी काफी आलोचना की पर वो अपने काम से तस से मस न हुआ ।

उसकी काम के प्रति दीवानगी और मेहनत के आगे सभी तरह की परेशानियाँ बौनी साबित हो गयीं ।

आज 5 वर्ष बाद उसका शहर में प्रसिध्द Restaurant है । और वो पूरी ख़ुशी के साथ अपने जीवन को आनंद-पूर्वक जी रहा है ।

आज वो खुश है क्योंकि उसने जो चाहा था, वो पा लिया ।

दोस्तों,

शिकायत में अपना जीवन न बिताओ ! अगर अपने जीवन की दिशा और दशा बदलना  चाहते हो तो छोटी पर एक दृढ कोशिश/शुरुआत करो …………और अपनी सफलता सुनिश्चित करो ।

तो दोस्तों तय करो, कि  आपको कौन सा मार्ग चुनना है………………

शिकायत  या  कोशिश

 

                                                                         आपके उज्जवल भविष्य का आकांक्षी………

                                                                                                                                                 आपका अपना दोस्त

प्रणव भारद्वाज


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो,
       यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  Motivational Story, Article, कविता, Idea, Essay, Real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों )…………..

      जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

      तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

      पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।

धन्यवाद!!!

 

 

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3 Comments on Shikayat v/s Koshish

Pranav Bhardwaj (Author) said : administrator Report 8 months ago

thanks for feedback 

Amul Sharma said : Guest Report 9 months ago

very nice article.....bahut accha samjhaya hai aapne.....accha laga.....thanks.......

reshu sharma said : Guest Report one year ago

jeveen ka sch hi utar diya sir..... very nice

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