PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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सफलता की कुंजी

 

दोस्तो,

   यदि, आप अपने कार्य से (जो आप, आज कर रहे हो / या भविष्य में करना चाहते हो) प्यार करोगे, और उस कार्य को पूरी इमानदारी से करोगे, तो मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि, आप वो सब कुछ या उससे भी कहीं ज्यादा हासिल कर लोगे जो आप पाना चाहते हो / या पाने की सोचते हो

दोस्तो,

   यहाँ मैं आपसे इतिहास की एक सच्ची घटना share करना चाहता हूँ, जिससे आपको यह दृढ विश्वास  हो जाएगा, कि यदि आपके मन में विश्वास है, और आप अपना काम पूरी शिद्दत के साथ कर रहे हो, तो सब कुछ संभव है । आपको ऐसा सुखद परिणाम मिलेगा, जो आपको आश्चर्यचकित कर देगा ।  

दोस्तो,

   यह कहानी है, ह्युबर्ट ब्रीडली की । एक ऐसा युवा, जिसने एक नामुमकिन सा सपना देखा, और उस नामुमकिन लगने वाले सपने को अपने विश्वास, संघर्ष और जिद्द की बदौलत हकीकत में बदल दिया । उसने समाज के सामने सफलता की एक अनोखी मिशाल प्रस्तुत की ।

   ह्युबर्ट ब्रीडली का जन्म एक बहुत गरीब परिवार में हुआ था । जब वह 12 वर्ष का था, तो उसने मजदूरों की तरह पहाड़ियों को तोड़ने का कार्य शुरू किया । 18 वर्ष का होते- होते वह रेल लाइन पर रोड़ी डालने का काम करने लगा । एक दिन काम करते-करते उसके मन में एक विचार आया “ क्या वह रेलवे का प्रबंधक बन सकता है ???”

दोस्तो,

   अब यदि कोई व्यक्ति उसकी बातें सुनता, तो क्या बेबकूफ ! के अलावा उसे और कुछ कहता??? कहाँ रेलवे का प्रबंधक और कहाँ रोड़ी डालने वाला ??? क्या दोनों में कोई तुलना की जा सकती है ???

    परन्तु, ब्रीडली ने अपने मन में यह निश्चय कर लिया, कि परिणाम कुछ भी हो, वह अपनी तरफ से किसी भी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ेगा और प्रबंधक बनकर ही रहेगा । वह अपने इस सपने को जीने लगा । वह अपने कार्य में जोर – शोर से लग गया । कुछ समय के बाद, काफी कोशिश करने के बाद वह रेलवे लाइन व स्लीपर कोचों की जांच के काम पर नियुक्त कर दिया गया । वह बराबर प्रबंधक बनने का सपना देख रहा था । वह रात- दिन इसी धुन में लगा रहता था, और अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ करता ।

    बहुत परिश्रम के बाद, वह स्विच-मन बना दिया गया । उसने अपने कार्य और व्यवहार के बदौलत अन्य अधिकारियों से मित्रता कर ली, तथा वह धीरे-धीरे अन्य विभाग के कार्य भी सीखने लगा । कुछ समय बाद उसकी प्रोन्नति (promotion) हो गयी और वह स्विच-मैन से स्टेशन-मास्टर बना दिया गया । उसे अब तक रेल विभाग के लगभग सभी कार्यों की जानकारी हो गयी ।

उसी दौरान एक बार प्रबंधक महोदय बीमार हो गये, प्रशासनिक(administrative) कार्यों में काफी बाधा उत्पन्न होने लगी । ब्रीडली उनका हाल-चाल जानने उनके घर गया ।

प्रबंधक  : मेरे बीमार होने के कारण, सभी काम अस्त-व्यस्त हो गया है । लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।

ब्रीडली  : महोदय अभी आप अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिएगा ।

प्रबंधक : लेकिन, प्रशासनिक(administrative) कार्यों का क्या ???

ब्रीडली ने बड़ी विनम्रता के साथ कहा “ सर, यदि आप आदेश दें ! तो मैं कार्य-भार देख लूँ ? मैं आपको यकीन दिलाता हूँ, कि मैं आपको किसी भी शिकायत का मौका न दुँगा । और मैं इसके लिये कोई पारिश्रमिक(salary) भी नहीं लुंगा

प्रबंधक महोदय ब्रीडली के आत्म-विश्वास से काफी प्रभावित हुए । उन्होंने ब्रीडली की प्रार्थना स्वीकार कर ली । ब्रीडली ने अत्यंत कुशलता के साथ व पूरी इमानदारी से कार्य-भार संभाला ।

उसका कार्य देखकर, रेलवे विभाग वाह-वाह कर उठा ।

प्रबंधक महोदय, स्वस्थ होकर आये तो उन्होंने ब्रीडली को बहुत-बहुत धन्यवाद् दिया ।  

ब्रीडली का यह अनुभव काफी शानदार रहा और अब वह सचमुच अपने आपको स्थाई रूप से प्रबंधक के रूप में देखने लगा ।

समय बीतने लगा, कुछ समय बाद प्रबंधक को रिटायर होना था । ब्रीडली को यह विश्वास था कि, अगला प्रबंधक वही बनेगा, पर हुआ उसका उल्टा ।

एक दिन प्रबंधक ने ब्रीडली को अपने कक्ष में बुलाया और उसको काफी डांटा ।

प्रबंधक ने ब्रीडली को ये लिखित आदेश दिया कि तुम्हे रेल विभाग में झाडू लगाने का कार्य करना होगा ।

ब्रीडली को काफी दुःख हुआ । उसने सोचा कि प्रबंधक मोहदय ने उसकी सेवा, योग्यता को नजरंदाज कर दिया है ।

वह टूट गया, और आंख में आँसू भरकर बोला मोहदय, मैं आपके आदेश का पालन करूँगा । ब्रीडली झाड़ू लगाता जाता और रोता जाता पर वो बीच बीच में मुस्कुराता था ।  उसके मन में अभी भी ये विश्वास था, कि वह एक दिन प्रबंधक बनकर रहेगा ।

उसने झाड़ू लगाना स्वीकार किया, क्योकि वो किसी भी हाल में रेलवे से अलग नही होना चाहता था । उसे रेलवे से बहुत लगाव था, उसने मन में सोचा कि फिर संघर्ष करेगा और प्रबंधक बनकर ही रहेगा

 उसने अपना कार्य पूरी ईमानदारी से किया, और इसका पुरस्कार उसे मिला ।

     दो दिन बाद प्रबंधक ने उसे अपने कक्ष में बुलाया और गले से लगाकर कहा, “ब्रीडली ! तुम परीक्षा में खरे उतरे । तुम्हें मेरा ही पद मिलेगा, क्योंकि तुम्हारे पास कोई डिग्री नहीं थी । इसीलिए समिति ने फैसला किया था, कि तुम्हारी परीक्षा ली जाए और यह सुनिश्चित किया जाये, कि तुम रेलवे से किस सीमा तक प्यार करते हो

तुम्हारा लगाव गजब का था, आज से तुम प्रबंधक के पद पर नियुक्त किये जाते हो ।

यह सुनकर ब्रीडली की ख़ुशी का ठिकाना न रहा । आज उसका सपना साकार हो गया । वह रोड़ी डालने वाले लड़के से प्रबंधक बन गया । उसकी मेहनत आज सफल हो गयी उसने अपनी मंजिल पा ली ।

दोस्तो,

      जब आप अपनी मंजिल की तरफ कदम बढाओगे, तो यह सम्भव है, कि विघ्न-बाधाएं आयें और मंजिल पाने में थोडा समय ज्यादा लग जाए, पर आप अपना धैर्य न खोइयेगा, हिम्मत न हारियेगा । परिस्थितियाँ, चाहें जैसी भी हो, पर हर परिस्थिति में आपको, अपनी निगाह अपनी मंजिल पर रहनी होगी । यदि आपको अपने आप से/अपने कार्य से प्यार है, और आप उसे पूरी ईमानदारी के साथ कर रहे हो, तो आपको अपनी मंजिल पाने से कोई नहीं रोक सकता है, आप खुद भी नहीं ।

      तो आइये सफलता की इस कुंजी को अपने जीवन में अपनाएं और जीवन के हर क्षेत्र में अपनी सफलता सुनिश्चित करें ।

 

                                                      आपके सुखद वर्तमान और उज्जवल भविष्य का आकांक्षी……………

                            आपका अपना दोस्त 

                            प्रणव भारद्वाज 

$ यह सच्ची कहानी महान लेखक स्वेट मार्टेन जी की पुस्तक से प्रेरित है । $


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो,
       यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  Motivational Story, Article, कविता, Idea, Essay, Real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों )…………..

      जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

      तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

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धन्यवाद!!!

 

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3 Comments on Safalta Ki Kunjii

Rajendra Prakash said : Guest Report one year ago

Very Inspirational real story . i impressed very much

sunil behera said : Guest Report 2 years ago

Leave your comment here.....bohot achha story thha sir.bohot sikhne mila.

Reshu sharma said : Guest Report 2 years ago

khani m dm tha boss.... thanku very much.... ki aap se hme ek platform mila... ki itni acchi bato se kuch sikh ske..... greatfull thanks

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