PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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कथनी और करनी

दोस्तो,

      बहुत समय पहले की बात है । एक शहर में एक प्राचीन मंदिर था । वहां एक पंडित जी रहते थे । मंदिर का पुजारी होने के साथ-साथ पंडित जी प्रवचन भी करते थे । वो समाज में हो रहे नैतिक पतन से काफी दुखी रहते थे । अपने प्रवचन के माध्यम से वह यह कोशिश करते थे, कि समाज को एक नयी दिशा मिल सके । पंडित जी, अपने प्रवचन से लोगों को भलाई और ईमानदारी की शिक्षा दिया करते थे । वो चाहते थे कि सभी लोग मिल जुल कर रहें, और हमारा समाज उन्नति करे । वो अपने प्रवचन के माध्यम से समाज व्याप्त बुराइयों को दूर करने का प्रयास करते थे । वह यह सोचते थे कि यदि हमारा समाज उन्नति करेगा तभी हमारा देश उन्नति करेगा । उनकी ख्याति दूर-दूर तक पंहुंचने लगी, उनका प्रवचन सुनने के लिए खूब भीड़ इकठ्ठा होने लगी । पंडित जी को लोग खूब पसंद करने लगे । पंडित जी के पास अन्य शहरों से भी प्रवचन के लिए प्रस्ताव आने लगे । प्रवचन के सिलसिले में उनको आये दिन दूसरे शहरों में भी जाना पड़ता था ।

      एक बार पंडित जी को प्रवचन के सिलसिले में दूसरे शहर जाना था । पंडित जी बस में चढ़े । उन्होंने बस कंडक्टर को 100 का नोट दिया । कंडक्टर ने किराये के पैसे काटकर उन्हें बाकी रूपये वापस कर दिए । तो, पंडित जी ने देखा की कंडक्टर ने गलती से उन्हें 10 रुपये ज्यादा दे दिए हैं ।  पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को रूपये वापस कर दुंगा । लेकिन पंडित जी के मन में लालच आ गया ।  उन्होंने अपने आप से कहा कि पैसे वापस करने की कोई जरूरत नहीं है । उन्होंने सोचा कि इस बस वाले की तो रोज की कमाई अच्छी-खासी है । अगर मैं इसके १० रुपये वापस न दूं, तो इस पर क्या फर्क पड़ेगा???

पंडित जी बहुत उलझन में थे, एक मन कह रहा था कि उनको १० रुपये वापस कर देने चाहिए, लेकिन एक मन कह रहा था कि नहीं करना चाहिए ।

पंडित जी विचारों के जाल में उलझते ही जा रहे थे ।  समझ ही नहीं आ रहा था कि  क्या करें ???

      उनके मन में यह अंतर-द्वन्द चल ही रहा था कि, वो जगह आ गयी जहाँ पंडित जी को जाना था । बस से उतरते समय पंडित जी अचानक से रुके । उन्होंने दस रुपये निकालकर बस कंडक्टर को देते हुए कहा “ भाई तुमने मुझे किराये के रुपये काटने के बाद दस रुपये ज्यादा दे दिए थे । आप अपने रुपये स्वीकार करो ”

      कंडक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा “ पंडित जी, मैंने आपके बारे में बहुत सुना है । मैंने सुना है कि, आप अपने प्रवचन में लोगों को ईमानदारी अपनाने की सलाह देते हो । आप लोगों को बहुत अच्छी और सच्ची बातें बताते हो । मैं आपसे बहुत प्रभावित हूँ, और आपके प्रवचन सुनने आना चाहता हूँ, लेकिन समय के अभाव में, मैं आपके प्रवचन सुनने नहीं आ पाया । लेकिन आज जब आपको, अपनी बस में देखा तो मैंने सोचा कि क्यूँ न पहले आपको परख लिया जाए ?

मैं जानना चाहता था, कि जिस अच्छाई की आप शिक्षा देते हो, उसका आप पालन भी करते हो या नहीं ।

आपकी कथनी और करनी में कोई अंतर तो नहीं हैं ???

पर आज मुझे ख़ुशी हुई कि, आपकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं हैं ।

आज मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि आप जो बोलते हो, आप उसको अपने जीवन में अपनाते भी हो

अब मुझे पता चल गया कि आपके प्रवचन जैसा ही आपका आचरण भी है, जिससे सभी को सीख लेनी चाहिए ।

उसने कहा, पंडित जी मैं आपको नमन करता हूँ, और आपसे वायदा करता हूँ कि मैं ईमानदारी को अपने जीवन में सबसे पहली प्राथमिकता दुंगा और अन्य साथियों को भी ईमानदारी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करूँगा ।

मैं अपना और अपने परिवार का जीवन सफल बनाने के लिए, अपने पूरे परिवार के साथ आपके प्रवचन में आऊंगा ।

   पंडित जी यह सुनकर बहुत खुश हुए । उन्होंने मन ही मन प्रभु को धन्यवाद दिया और अपने लालच के लिए परम-पिता-परमेश्वर से माफ़ी मांगी और प्रवचन के लिए निकल पड़े ।

दोस्तो,

   यदि हम ध्यान से समझने की कोशिश करें, तो इस कहानी में हमारे समाज/देश को महान बनाने का राज छुपा हुआ है ।

कैसे???

दोस्तों,

    आज हमारे समाज/देश में अनेक तरह की बुराइयाँ ( दहेज़ प्रथा, भुखमरी, अशिक्षा, धूम्रपान भ्रष्टाचार, बेईमानी, इत्यादि) अपनी जड़ जमाये हुए हैं ।

    अक्सर हम देखते हैं, कि हमारे बड़े- बुजुर्ग, और हम लोग इन बुराइयों पर बहुत बड़ी-बड़ी और कई घंटों तक चलने वाली चर्चा करते हैं । और यह भी चाहते हैं, कि ये  बुराइयाँ जड़ से समाप्त हो जाएँ और हमारा समाज/देश उन्नति के मार्ग पर आगे बढे ।

पर क्या केवल चर्चा से इसका समाधान निकला जा सकता है?

केवल बड़ी-बड़ी बातें करके इन बुराइयों को दूर किया जा सकता है ?

नहीं ! बिलकुल भी नहीं !

दोस्तो,

    अगर हम ईमानदारी से सोचें तो इन बुराइयों को बढ़ने देने में कहीं न कहीं हम लोग भी दोषी हैं । और यह भी सच है की यदि हम लोग चाहें तो इन बुराइयों को आसानी से खत्म किया जा सकता है ।

 

समाधान 

दोस्तो,

    यदि हम वाकई में इन कमियों/बुराइयों को दूर करना चाहते हैं, तो हमें खुद से पहल करनी होगी । हमें अपने अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों को जानना होगा और पूरी ईमानदारी और समर्पण भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन (पालन) करना होगा ।

    उदाहरण के लिए :: यदि हम अपने साथियों/अपने से उम्र में छोटे नौजवान मित्रो, से कहते हैं कि भाई “ धूम्रपान बहुत गलत आदत है, यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है, और हम सभी लोगों को यह गन्दी आदत छोड़ देनी चाहिए” लेकिन हम स्वयं धूम्रपान करते हैं !

तो, क्या वो लोग, आपकी बात मानेंगे?

आपके पीठ-पीछे वो लोग आपके बारे में क्या कहेंगे/ क्या सोचेंगे ? ( क्या यह बताने की आवश्यकता है…….. )

क्या इन बातों का उन पर कोई प्रभाव होगा ?

नहीं ……..बिलकुल भी नहीं

दोस्तों,

    हमारे आचरण का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है । क्यूंकि हमारी आने वाली पीढी वही सीखती है जो वह देखती है । यदि हम चाहते हैं, कि हमारा समाज धूम्रपान से रहित हो । हमारे बच्चे धूम्रपान न करें । हमारी आने वाली पीढ़ी धूम्रपान से और धूम्रपान करने वालों से नफरत करे, तो सबसे पहले हमें धूम्रपान छोड़ना होगा । हमें धूम्रपान छोड़ कर समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करना होगा, और अपने साथियों को भी धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा । तभी हमारी बातों का सकारात्मक प्रभाव होगा

दोस्तो,

    यहाँ आपके मन में यह सवाल उठ सकता है, कि भला मेरे या एक अकेले व्यक्ति के धूम्रपान छोड़ने से क्या होगा? क्या इससे यह समस्या खत्म हो जाएगी???

दोस्तों,

    हमें खुद से पहल करनी है, यदि आप इतिहास पर नजर डालें तो आप आसानी से यह जान सकते हैं कि अच्छे और महान कार्यों की शुरुआत अकेले से ही होती है, और फिर लोग जुड़ते चले जाते हैं । इसी तरह से यदि आप शुरुआत करते हो तो आप देखोगे की धीरे-धीरे चीजें सही होती चली जाएगी और इस तरह से हम किसी भी बुराई/बुरे काम को जड़ से समाप्त कर सकते हैं ।

दोस्तो,

    यह समाज/देश हमारा है, हमारा अपना । और यदि समाज/देश में कोई भी कमी या बुराई है, तो हमारा यह कर्त्तव्य है, कि हम उस बुराई का पूरे तन, मन, धन से विरोध करें, और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी बुराई का विरोध करने और उसको समाप्त करने में हमारा स्थान सबसे पहला हो । इस तरह से हम अपने आप को, अपने समाज को, अपने प्यारे देश को अच्छा और महान बनाने में अपनी प्रभावी और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । ऐसा करके हम अपने समाज/देश की उन्नति सुनिश्चित कर सकते हैं ।

दोस्तो,

अब से 2 दिन बाद  होली  का पावन और पवित्र त्यौहार है ।  

    तो आइये हम, अपनी गन्दी आदतों का होलिका कुंड में दहन करें और अच्छी आदतों को अपनाने का संकल्प लें । हम अपनी कथनी और करनी में कोई अंतर न रखेंअच्छी आदतों को अपने जीवन में उचित स्थान दें, क्यूंकि यदि हम वाकई में कोई बदलाव चाहते हैं तो यह शुरुआत हमसे होनी चाहिए

तो आइये एक नयी शुरुआत के नायक बनें ।

मित्रो,

    आपको और आपके पूरे परिवार को होलीकी रंगबिरंगी शुभकामनायें

    आपकी जिंदगी में खुशियों का हर वो रंग हो जो आप चाहें ।

आपका अपना दोस्त

प्रणव भारद्वाज

 


खुला आमंत्रण


 

दोस्तो,
       यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  Motivational Story, Article, कविता, Idea, Essay, Real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों )…………..

      जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

      तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

      पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।

धन्यवाद!!!

 

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1 Comment on Kathni Aur Karni

reshu sharma said : Guest Report 2 years ago

very effective sir....

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