PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

Read More....

Like Us On Face Book Page
log-kya-kahenge

लोग क्या कहेंगे ???

     एक बार एक संत अपने एक शिष्य के साथ किसी गाँव में प्रवचन करने जा रहे थे । जिस मार्ग से उनको जाना था उस मार्ग का एक छोटा हिस्सा कीचड से भरा हुआ था । इस मार्ग के अतिरिक्त उनके पास और कोई विकल्प नहीं था । मार्ग में उन्होंने एक किशोर स्त्री को देखा । स्त्री मार्ग पार करना चाहती थी, पर इसी भय में की कहीं वो इस कीचड में न फँस जाए वो मार्ग पार नहीं कर पा रही थी । संत उस स्त्री की परेशानी समझ गये । संत ने सड़क पार कराने में स्त्री की मदद की, और इस तरह संत की मदद से उस स्त्री ने सड़क पार की ।

     शिष्य, जो यह सब देख रहा था, उसने संत से कहा : गुरु जी, आप एक संत हैं, और एक संत/सन्यासी के लिए स्त्री से बात करना तक वर्जित(मना) है । आपने यह बात जानते हुए भी उस स्त्री की मदद की ।

यदि किसी ने हमें देख लिया, तो लोग हमारे बारे में क्या कहेंगे/क्या सोचेंगे?

कहीं ऐसा ही न हो, कि लोग हमें सन्यासी मानने से ही इनकार कर दे?

     संत ने अपने शिष्य को समझाते हुए कहा : बेटा, हमारी जिंदगी में यह प्रश्न प्रति दिन, प्रति पल आएगा? आज मैं तुम्हें इस समस्या के समाधान के बारे में कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण/उपयोगी बातें बताऊंगा…….

     संत ने शिष्य को समझाते हुए कहा कि, हम चाहे किसी भी धर्म, संप्रदाय, वर्ग, व्यवसाय, लिंग, जाति से सम्बन्ध रखते हों, पर यदि हम इन चार नियमों का पालन करेंगे तभी हम अपना जीवन सफल बना पायेंगे ।

  1. सबसे बड़ा धर्म : इंसानियत….. हम कोई भी काम करते हों, पर सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि, सर्वप्रथम हम एक इंसान हैं, और हमारा सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है. यदि हम यह देखें कि, कोई इंसान(पुरुष/स्त्री) संकट में है और हम उसकी मदद कर सकते हैं, तो हमें इस बात कि परवाह न करते हुए कि लोग क्या कहेंगे? उस व्यक्ति की यथा संभव(जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके) मदद करनी चाहिए. जब हम किसी के प्रति कोई व्यवहार करें तो इसके पूर्व हमें स्वयं को दूसरों की स्थिति में रखकर विचार करना चाहिए, क्योंकि जब तक हम स्वयं को उनके स्थान पर नहीं रखेंगे, हम उनके दुःख और वेदना का अनुभव नहीं कर सकते.

अतः हमें हर परिस्थिति में अपने धर्म ………इंसानियत का पालन करना चाहिए ।

  1. सबसे बड़ी भक्ति : राष्ट्र-भक्ति ……हमने जिस देश में जन्म लिया है, हमारी सबसे बड़ी पहचान हमारा देश है, हमें यह समझना चाहिए की यदि देश सुरक्षित है, तो हम सुरक्षित हैं ! देश पहले है, बाद में हम हैं ! हमें अपने देश को हर परिस्थिति में सबसे ऊपर रखना है. चाहे परिस्थितियां (अनुकूल/प्रतिकूल) कैसी  भी क्यों न हो? हमे कुछ भी ऐसा न तो बोलना चाहिए/न ही करना चाहिए /और न ही सोचना चाहिए जिससे हमारा देश बदनाम हो/या हमारे देश की हानि(नुकसान) हो. यदि हमें देश की खातिर अपना जीवन भी कुर्बान करना पड़े, तो उसके लिए भी तैयार रहना होगा क्योंकि देश से बढ़कर कुछ भी नहीं है. इस स्थिति में हमें इस बात की तनिक भी परवाह नहीं करना चाहिए की कौन क्या सोचेगा?
  2. लक्ष्य : जब हम अपना लक्ष्य चुनेगे तो हमारे सामने यह प्रश्न अनेक बार  आयेगा. पर हमारा कर्तव्य यह है की हम अपना लक्ष्य पूरी ईमानदारी, विवेक और सावधानी से चुने. और एक बार अपना लक्ष्य चुनने के बाद बिना इस बात की परवाह किये की लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे/कहेंगे??? हमारा यह कर्तव्य होना चाहिए कि हम अपने लक्ष्य पर अडिग रहें और अपने लक्ष्य को हर हाल में प्राप्त करें.
  3. अन्य किसी भी परिस्थिति में : जब भी हम कोई काम करें, हमें केवल और केवल ऊपर बताई गयी तीनों बातों का ध्यान रखना है.  

    किसी भी परिस्थिति में हम यह न सोचें कि लोग हमारे बारे में क्या कहेंगे/ क्या सोचेंगे? हमें केवल इतना ध्यान रखना है कि हम अपने बारे में क्या सोचते हैं? और हम अपना काम कितनी ईमानदारी से करते है? क्या हम खुद अपने आप से संतुष्ट हैं? क्या हम या हमारा काम यदि पूरी तरह से ऊपर कही गयी शर्तें पूरी करता है, यदि हाँ तो हमें और कुछ भी सोचने की जरूरत नहीं है

    यदि हम इस तरह से अपना जीवन जियेंगे, तभी हम एक सफल और शानदार जीवन जी सकते हैं अन्यथा यह प्रश्न हमें जीवन में कभी सफल नहीं होने देगा ।

दोस्तों,

    संत द्वारा दिए गये सन्देश से यह स्पष्ट है की यह सवाल

…….. लोग क्या कहेंगे……

    हमारे जीवन में प्रति पल आएगा, पर यदि हमें एक सफल जीवन जीना है तो हमें बिना इस बात की परवाह किये जीवन को जीना होगा ।

दोस्तों,

    इस सवाल ने न जाने कितने लोगों का जीवन बर्वाद कर दिया, यह एक ऐसा सवाल है, जिसमे आप एक बार उलझे तो आप चाह कर भी इससे नहीं निकल सकते।

   क्योंकि यह केवल सवाल ही नहीं बल्कि सवालों का एक ऐसा दलदल है जिसमे आप एक बार उलझे तो आप इसमें धंसते ही चले जाएँगे ! आपको जानकर हैरानी होगी कि यह सवाल अपने साथ अपने रिश्तेदारों कि पूरी फ़ौज लेकर आता है, जैसे………

   यदि आप कोई काम शुरू करना चाहते हैं और आपने सोचा कि यदि मैं यह काम करूँगा तो लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे? इस स्थिति में यह प्रश्न और इसके रिश्तेदार…………

  • लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे?
  • लोग मेरे काम को पसंद करेंगे या नहीं?
  • यदि लोगों ने मेरे बारे में कुछ गलत कहा तो?
  • यदि मैं असफल हो गया तो ?
  • यदि जैसा मैंने सोचा है, वैसा नहीं हो पाया तो ?
  • मेरे भविष्य का क्या होगा?

   और आप इन सवालों के चक्रव्यूह में  इस तरह उलझ जाओगे कि, आप पूरी काबिलियत होते हुए  भी अपना मनपसंद काम नहीं कर पाओगे । इसका दुष्परिणाम यह होगा कि जिंदगी आपकी होगी पर आप लोगों के हिसाब से जिंदगी को जीओगे । आप वो सब कुछ करोगे जो और लोग चाहते हैं पर आप चाहते हुए भी कुछ भी ऐसा नहीं कर पाओगे जो आप करना चाहते हो । आपकी ऐसी आदत बन जाएगी कि जब भी आप कोई भी काम शुरू करना चाहेंगे तभी अन्दर से आवाज आएगी …………अरे लोग क्या कहेंगे? 

   लेकिन यदि आप इस सवाल में उलझना ही नहीं चाहते और अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हो तो आपको केवल इतना करना होगा की आप ऊपर बताई गयी बातों को अपने जीवन में उचित स्थान दें ।

और जो आप करना चाहते हैं, उसे अपने मन की गहराहियों से करें ! बिना इस बात कि चिंता किये कि लोग क्या कहेंगे???

और जब भी आपके मन में यह सवाल उठे तभी इस सवाल को कुचल दें और अपने आप से पूरे आत्म-विश्वास के साथ कहें……..  

   यह जिंदगी मेरी है, मैं इसे अपने हिसाब/तरीके से जीऊंगा । दुनिया मैं मेरी अपनी एक जगह है, और मेरी जगह मेरे अलावा और कोई नहीं ले सकता…..कोई भी नहीं । मैं जानता हूँ कि जिंदगी न मिलेगी दुबारा । मैं हर पल को जीऊंगा ।

मैं जैसे चाहूँगा, वैसे अपनी जिंदगी को पूरी जिन्दादिली से जीऊंगा ।  

क्यूंकि मैं परम पिता परमेश्वर कि संतान हूँ और मैं अपनी जिंदगी को जीने के लिए पूरी तरह से समर्थ हूँ ।

कोई मेरे बारे में क्या कहता/ क्या सोचता है?? मुझे उससे क्या???

   क्यूंकि…

                    enlightenedकुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना ………enlightened

 

                                                                                                आपके हर पल की खुशियों का आकांक्षी

                                                                                                                                           आपका अपना दोस्त

प्रणव भारद्वाज


खुला आमंत्रण


दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

धन्यवाद!!!

 

TAGS
RELATED POSTS

4 Comments on Log Kya Kahenge ???

pooja sharma said : Guest Report 2 years ago

Such a inspirational artical

manisha said : Guest Report 2 years ago

its true..we always think log kya khenge ..nyc story ..thnks

manisha said : Guest Report 2 years ago

its true ..we always think log kya khenge..

reshu sharma said : Guest Report 2 years ago

baat m dm j boss

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked