PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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jadoo
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Jaadoo….. Hamari Soch Ka !

By on February 14th, 2016

जादू !

     हमारी सोच का…

दोस्तो,

      जैसा कि आप जानते हैं, कि मैं  Motivational Speaker/ Writer  हूँ । मैं समय-समय पर हमारी नौजवान पीढ़ी के लिए Free Motivational Seminars करता हूँ । यहाँ मैं आपसे, अपने एक Motivational Seminar के, एक रोचक और ज्ञान से भरपूर अनुभव को share करना चाहता हूँ ।

      Seminar में Group-discussion के दौरान मैंने class 12th के बच्चों से कहा : बच्चों, मुझे यह विश्वास है कि, आज से 25 वर्ष बाद हमारा प्यारा, देश- भारत, विकसित देशों में सबसे पहले स्थान पर होगा । हमारा देश हर तरह से विकसित और सम्पन्न हो जाएगा । हम सभी देशों को पीछे छोड़कर नंबर-1 पर होंगे ।

   इस विषय पर आप क्या सोचते हो? ऐसा संभव हो सके, उसके लिए आपके पास जो भी अच्छे सुझाव/ideas हो, आप बताएं ।

बच्चों ने कुछ इस तरह जबाब दिए ………

  • सर, आप ऐसी बात कर रहे हैं, जो कि संभव है ही नहीं
  • विकसित होने के लिये सभी को रोजगार देना होगा, लेकिन हमारे देश की जनसँख्या बहुत ज्यादा है, सरकार सभी को रोजगार नहीं दे सकती
  • प्राइवेट सेक्टर भी सभी को रोजगार नहीं दे सकता
  • हमारे देश में अशिक्षा बहुत ज्यादा है जबकि विकसित देश होने के लिए सभी लोगों का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है……अतः यह बहुत मुश्किल है
  • बहुत कारखाने लगाने होंगे, जो की लगभग असंभव है
  • गरीबी बहुत ज्यादा है, उसे दूर करना बहुत मुश्किल है
  • हम तकनीक(technology) मे बहुत पीछे हैं

उन्होंने वो सभी कारण बताये, जिनसे ये पता चल रहा था कि हमारा देश नंबर-1 विकसित देश क्यों नहीं बन सकता?

मैंने बच्चों से कहा : बच्चो आपने मेरा प्रश्न ठीक से नहीं सुना, मैंने कहा की आप कुछ ऐसा बताओ जिससे हमारा देश नंबर-1 विकसित देश बन सकता है, और आप ये बता रहे हो की हमारा देश नंबर-1 विकसित देश क्यों नहीं बन सकता?

अब आप दोबारा से विचार करो और फिर बताओ……….

शुरू में बच्चे झिझकने लगे और बोले

  • हमने सुना है, की हमारा देश सोने की चिड़िया कहलाता था, यदि ये पहले मुमकिन था तो अब भी संभव है
  • सरकार को देश में प्रतिस्पर्धी माहौल (competitive environment) बनाना होगा ताकि हमारे देश का तीव्र गति से विकास हो सके
  • हम सभी देश-वासियों को मिल-जुलकर आगे बढ़ना होगा
  • ऐसी शिक्षा नीति लानी होगी, जो पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार भी सुनिश्चित कर सके
  • ऐसे कानून बनाने होंगे जो की हमारे देश के विकास में सहायक बन सकें
  • समाज में जागरूकता पैदा करनी होगी
  • ऐसा विकास करना होगा जिसमे सर्वांगीण(सबका) विकास हो सके

और भी बहुत अच्छे सुझाव ?

वाकई में ये बहुत सुखद अनुभव था, कुछ देर पहले जो बच्चे जिस चीज को नामुमकिन बता रहे थे, पर जब उन्होंने  इस तरह से सोचा की यह  ये मुमकिन है, तो उन्होंने उसको सम्भव होने के अनगिनत कारण बता दिए  ।

दोस्तों,

   इसका मतलब एकदम सपष्ट है कि, हमारा दिमाग उस दिशा में सोचता है, जैसा हम चाहते हैं ।

   आइये यहाँ हम, हमारे दिमाग के काम करने के बारे में थोडा जानने की कोशिश करते हैं………….

दोस्तों,

हमारे दिमाग के पास दो सहायक होते है।

  1. Mr. Positive 
  2. Mr. Negative

हमारा दिमाग सभी कार्यों के लिए पूरी तरह से इन दोनों सहायकों पर ही निर्भर करता है । जब भी हम सोचते है कि हम कोई काम कर सकते है, तो Mr. Positive तुरंत ही, सक्रिय (active)  हो जाते है, और अपने कार्यकर्ताओं को काम पर लगा देते है, ये कार्यकर्ता, हमारे दिमाग को वो सभी कारण बताते हैं, जिनसे कि हमको यह यकीन हो जाए कि हम वो काम आसानी के साथ कर सकते है, और हम वो काम कर लेते हैं,

लेकिन, इसके विपरीत यदि हम यह सोचते हैं कि यह काम नहीं हो सकता, तो तुरंत ही  Mr. Negative सक्रिय(active) हो जाते हैं, और अपने कार्यकर्ताओं को यह आदेश दे देते हैं । ये Negative कार्यकर्ता हमारे दिमाग को वो सभी कारण बताते हैं, कि हम वो काम क्यों नहीं कर सकते? और हम वो काम नहीं कर पाते हैं ।

दोस्तों,

 हम इस बात को ऐसे समझ सकते हैं……….

श्याम(काल्पनिक नाम), एक 25 वर्ष का well qualified लड़का है । श्याम Business करने के बारे में सोचता है…..

श्याम सोचता है, कि वह बिज़नस कर सकता है……..तब Mr. Positive

श्याम सोचता है कि वह बिज़नस नहीं कर सकता है………….तब Mr. Negative

 

Mr. Positive

Mr. Negative

 मैं आसानी के साथ business कर सकता हूँ ।

 यह तो बहुत कठिन है । मैं नहीं कर सकता  

 समाज के सफल लोगों के बारे में जानने की कोशिश  करता है। और अपने आप को यह विश्वास दिलाता है  की, मैं आसानी के साथ business कर सकता हूँ।

समाज में जो लोग असफल हो गये हैं उनको देखता है, अपने आप को समझाता है की जब ये सभी असफल हो गये तो वो कैसे सफल हो पायेगा?

जब Mr. MARK JUKARBURG, जो मात्र 19 वर्ष के थे, उन्होंने अपनी जिद के कारण इतनी विशाल COMPANY- FACEBOOK बना दी

तो भला मैं क्यूँ नहीं कर सकता BUSINESS?

मेरे परिवार में तो आज तक किसी ने BUSINESS नहीं किया, तो मैं कैसे सफल हो पाउँगा?

इसमें तो बहुत पूजी लगेगी ।

Risk बहुत ज्यादा है।  

competition बहुत ज्यादा है ।

काम में लग जाता है, business की बारीकियां समझने की कोशिश करता है।  

बिज़नस में असफल होने के कारण खोजता रहता है ।

ये मन में सभी प्रकार के डर निकाल देता है, और पूरे मन से अपना काम करता है।  

हर वक़्त यही डर में रहता है की असफल हो गया तो???

इसके पास केवल एक ही मकसद होता है की मुझे हर हाल में सफल होना है ।

इसके पास हज़ार बहाने होते है की वो क्यूँ सफल नहीं हो सकता?

शुरू में थोड़ी परेशानियाँ आती हैं पर फिर भी पूरी हिम्मत के साथ अपना काम करता है, और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी अपने मेहनत और सोच के कारण सफल हो जाता है।

अगर/मगर मैं ही घिरा रहता है और जैसा सोचता है वैसा ही पाता है,

वह बिज़नस शुरू ही नहीं कर पाता।

 

मतलब एकदम स्पष्ट है जब ये सोचता है की वो सफल हो सकता है तो Mr.Positive उनको वो सभी कारण बताता है जिससे उसको यह विश्वास हो जाता है की वो सफल हो सकता है ……..और अंत में वो सफल हो ही जाता है ।

यहाँ भी जब वो सोचता है, की बिज़नस तो बहुत कठिन है और वो नहीं कर सकता तो Mr. Negative उनको हज़ार कारण बताता है जिससे उनको यह यकीन हो जाता है की वो असफल हो जाएगा और वो चाहते हुए भी बिज़नस नहीं कर पाता ।

दोस्तों,

   अब आप तय कीजिए की आपको कैसे (positive/negative) सोचना है???

हमारी सफलता/असफलता पूरी तरह से हमारी सोच पर ही निर्भर करती है

दोस्तों,

        ऐसा कहा भी गया है कि…….

Whether you think…………. you can, 

Or you think …………you can’t

You are right            ……. ( SIR HENRY FORD )

इसका सीधा सा अर्थ यह है कि,

यदि हम सोचते हैं की हम कर सकते हैं………तो हम कर सकते हैं,

लेकिन यदि हम सोचते हैं कि हम नहीं कर सकते………तो हम नहीं कर सकते

मतलब दोनों ही परिस्थिति में आप सही हैं।

दोस्तों,

  दुनिया की समस्त शक्तियां हमारे अन्दर हैं, हम जो चाहें, जैसा चाहें, वैसा कर सकते हैं/ वैसा प्राप्त सकते हैं………

               क्यूंकि जैसा हम सोचेंगे, वैसा ही हम बन जाएंगे !

 

                    enlightened   सच में, अद्भुत! जादू है, हमारी सोच का………enlightened

                                                             

                                                              आपके  हर पल की खुशियों का आकांक्षी………..

                                                                                                           आपका अपना मित्र

                                                                                                              प्रणव भारद्वाज


खुला आमंत्रण


दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

 

धन्यवाद!!!

 

 

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1 Comment on Jaadoo….. Hamari Soch Ka !

reshu said : Guest Report 2 years ago

very nice ji.... thanks... for aware

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