PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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चाहत !

जिंदगी जीने की

 

      दो लड़के, अमित और सुमित (काल्पनिक नाम), एक ही मोहल्ले में रहते थे, दोनों लड़के सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनकी बचपन की पढाई एक ही स्कूल में हुई थी । धीरे-धीरे वो अच्छे दोस्त बन गये । पढने में दोनों ही सामान्य थे, जब वो बड़े हुए तो उन्होंने एक ही कॉलेज से B.Com किया । उन दोनों ने आगे की पढाई करनी चाही, लेकिन परिवार की आर्थिक तंगी (पैसे की कमी) की वजह से वो आगे नहीं पढ़ सके ।

      दोनों ने नौकरी करने का निर्णय किया, और जल्दी ही दोनों को प्राइवेट कंपनी (Private Company) में नौकरी मिल गयी । कंपनी अलग-अलग थी, पर तनख्वाह (salary) लगभग-लगभग समान थी ।

      अमित अपना काम  बहुत मन लगाकर करता था । वो रोज कुछ न कुछ नया सीखने की कोशिश करता था, वो हर वक़्त इसी धुन में रहता कि, अपने काम को और बेहतर कैसे बनाया जाए? जल्दी ही वो यह जान गया, कि यदि उसे अपनी जिंदगी अच्छी बनानी है, तो उसे अपने काम को अच्छे से सीखने के साथ-साथ आगे की पढ़ाई भी करनी होगी । इसी कोशिश में, उसने एक तरफ मन लगाकर काम सीखा, और दूसरी तरफ M.Com प्राइवेट(correspondance) भी कर लिया ।

      इसके साथ-साथ अमित ने part-time में Account के अच्छे कोर्स भी कर लिए । अमित को अपने काम की अच्छी जानकारी थी और उसके पास डिग्री भी थी । उसने अपनी योग्यता की बदौलत Company में अच्छी जगह बना ली । अपने काम के प्रति दीवानगी और डिग्री की वजह से उसका जल्दी-जल्दी प्रमोशन(Promotion) हो गया और जल्दी ही वो कंपनी में Chief-Accountant बन गया । अब वो आराम की जिंदगी जीने लगा, उसे जिंदगी जीना अच्छा लगने लगा । उसके अन्दर जिंदगी जीने की चाहत, जाग गयी । वो रोज एक नए जोश के साथ जागता और पूरे उत्साह के साथ अपने काम पर जाता । वो पूरी निडरता के साथ अपनी जिंदगी को जी रहा था ।

      जबकि दूसरी तरफ सुमित जो ये सोचता था, कि अब तो नौकरी मिल ही गयी है, अब आगे पढ़कर क्या फायदा? जो काम मिलेगा उसे कर लेंगे । ज्यादा मन लगाकर या ज्यादा काम करने से भला मेरा क्या फायदा ? तनख्वाह (salary) तो उतनी ही मिलेगी जितनी मेरे साथियों को मिल रही है। वो नया काम सीखने/करने से बचता था । जो एक काम हाथ में ले लिया, वो उसमें ही लगा रहता, उस काम को धीरे-धीरे करता और कंपनी में टाइम-पास करने की कोशिश करता, और जैसे ही ऑफिस(office) टाइम ख़त्म होता तुरंत अपना सामान पैक करके अपने घर चला जाता । वो काम में भी ज्यादा रूचि नहीं लेता था, वो सोचता था की जितने पैसे मिलते हैं, उतने का तो काम मैं कर ही देता हूँ, उससे ज्यादा क्यूँ करूँ ? इसमें मेरा क्या फायदा है ? अपनी इसी सोच के कारण उसने न तो कुछ नया सीखा, न ही आगे पढाई की । उसे लगता था, कि जैसे-जैसे समय गुजरेगा, वैसे-वैसे उसकी तनख्वाह (salary) बढती जाएगी और वो बेहतर जिंदगी जीने लगेगा ।  

      धीरे धीरे समय गुजरने लगा, उसके अन्य साथियों का प्रमोशन(Promotion) हो गया, पर सुमित का नहीं । उसके साथियों को तनख्वाह (salary) भी ज्यादा मिलने लगी, पर सुमित जहाँ था वहीँ रहा ।

      अब सुमित परेशान हो गया, जब उसने इसका कारण जानना चाहा, तो उसे बताया गया :  सुमित जी, न तो आपने कोई Extra Accounting Course (tally etc) किया है, और न ही आपके पास कोई अतिरिक्त डिग्री (M.Com) है । इसी वजह से उसका प्रमोशन (Promotion) नहीं हो सकता ।  

       सुमित चिंतित रहने लगा । उसने अन्य कंपनी (Company) में नौकरी के लिए आवेदन (apply) किया, पर वहां से भी उसे निराशा ही हाथ लगी । सुमित इस बात को अच्छी तरह से जान गया कि, यदि वह अपनी वर्तमान नौकरी छोड़ता है, तो उसे अन्य कंपनी में यहाँ से भी कम तनख्वाह (salary) में काम करना होगा, क्यूंकि बेरोजगरी बहुत ज्यादा है, और उससे (सुमित से) कहीं ज्यादा योग्य और डिग्री वाले लोग, कम तनख्वाह (salary) में भी काम करने को तैयार हैं, अतः उसके लिए यही उचित रहेगा की वो इसी कंपनी में काम करता रहे ।

      अब वो परेशान रहने लगा । प्रमोशन(Promotion) होना तो नामुमकिन था ही, पर उसे यह चिंता भी सताने लगी की यदि यहाँ से नौकरी छूट गयी तो वो कहीं का भी नहीं रहेगा, क्यूंकि नयी नौकरी मिलना भी बहुत मुश्किल था, और अगर मिल भी गयी तो तनख्वाह (salary) बहुत कम मिलेगी ।

      अब उसका, काम में भी मन नहीं लगता, हर वक़्त यही चिंता रहती की यदि नौकरी छूट गयी तो……….आगे के बारे में सोचकर उसको बहुत डर लगने लगा । उसे अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा । उसे जीवन बोझ लगने लगा । वो बुझे मन(निरुत्साह) से काम पर जाता, और हर रोज भगवान् से यही प्रार्थना करता कि हे भगवान्! कैसे भी करके मेरा आज का दिन गुजार दे ।  

वो कभी अपने आप को कोसता, कभी अपने हालात को ।

      शाम को चैन की सांस लेता और सोचता कि चलो आज का दिन तो गुजर ही गया अब कल की कल देखेंगे । उसकी जिंदगी जीने की चाहत मानो खत्म सी हो गयी थी, उसको ज़िंदगी जीना बहुत कठिन लगने लगा, वो तनाव और डर के कारण बहुत उदास और चिडचिडा रहने लगा ।

दोस्तों,

      यहाँ समझने वाली बात ये है कि दोनों ने ही एक ही साथ काम शुरू किया था, परिस्थितियां भी लगभग-लगभग समान ही थी । पढाई भी समान की थी, कुछ भी ऐसा न था जो अलग हो, पर आज दोनों के हालात बहुत अलग-अलग हैं । हालात में जमीन-आसमान का अंतर है ।

      आज की स्थिति यह है कि, अमित एक तरफ अपनी जिंदगी को शान से जी रहा है, उसमे जिंदगी को लेकर एक उत्साह है वो अपनी जिंदगी को जीना चाहता है । अमित पूरी निडरता के साथ जी रहा है, उसे नौकरी जाने का तनिक भी डर नहीं है क्योंकि उसको यह विश्वास है, कि अगर नौकरी चली भी जाए तो क्या? कल को नयी मिल जाएगी ।अमित  अपने आज को भी जी रहा है, और एक नए जोश के साथ आने वाले कल को भी पूरे उत्साह और आशा के साथ जीने की तमन्ना रखता है ।

      वहीँ दूसरी तरफ सुमित  को अपनी जिंदगी बोझ लगती है, वो कैसे भी अपने आज को गुजारना चाहता है । उसे अपने आज से भी डर लगता है, और आने वाले समय से भी । वो आगे का सोच-सोच कर घबराता है, उसको जीवन जीने की ख़ुशी नहीं है, वो तो जीवन को कैसे भी गुजारना चाहता है ।

दोस्तो,

      ये एक काल्पनिक कहानी है, पर आपको जानकर हैरानी होगी, कि ज्यादातर लोग ऐसे ही जीवन को जीते हैं ।

      बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो पूरी निडरता के साथ जिंदगी को जीते हैं, वो अपने आज में मस्त रहते हैं और आने वाले कल का बड़ी शिद्दत के साथ, पूरे जोश और उमंग के साथ इंतज़ार करते हैं। उनके अन्दर जीवन को जीने की चाहत होती है वो हर समय खुश रहते हैं, जबकि ज्यादातर लोग डर में ही जीवन जीते हैं । कभी नौकरी जाने का डर कभी कुछ गलत हो जाने का डर कभी ये डर कभी वो डर । वो अपने सिर पर चिंताओं की पोटली लेकर जीते हैं, वो न तो जीवन को सही से जी पाते हैं, और न ही अपने जीवन को अच्छा बना पाते।

      उनके लिए खुश रहना, मानो दुनिया का सबसे कठिन काम हो । पर वो इस तरह से दिखाते हैं, जैसे दुनिया के सबसे ज्यादा व्यस्त व्यक्ति वो ही हैं, उनका मन बुझ गया होता है, बस वो कैसे भी जीवन को काटते हैं, और यही सोचते हैं, की हे भगवान्! कैसे भी आज का दिन गुजर जाए? कल का कल देखेंगे ।

     और फिर भाग्य को दोष देते हैं, कि मैं तो पूरे दिन मेहनत से काम करता हूँ, पर  फिर भी मुझे अच्छा परिणाम क्यूँ नहीं मिलता ? मेरा तो नसीब ही खराब है, तो मैं क्या कर सकता हूँ?

समस्या

      चाहत बहुत कुछ पाने की पर जब करने की बारी आये तो करना कुछ भी नहीं / या काम को आगे के लिए टालते रहना । और फिर भी यदि काम करना ही पड़े, तो काम कम करना और उसका दिखावा ज्यादा करना । ये सिद्ध करने की कोशिश करना, जैसे सारा काम मैंने ही किया है।

समाधान

दोस्तों,

      याद रखो यदि आपको हवाई जहाज में यात्रा करनी है, तो आपको उसकी कीमत देनी ही होगी (टिकट लेना ही होगा), और यदि आपको रेलवे की जनरल बोगी में तो उसकी कीमत । यहाँ ये भी समझा जा सकता है कि ये कीमत आपको यात्रा से पहले ही (advance) में ही चुकानी होगी, उसी तरह जब आपको शान से जिंदगी जीनी है, तो आपको उसकी कीमत चुकानी ही होगी । इसका मतलब साफ़ है की यदि आप अच्छी जिंदगी जीना चाहते हो तो आपको, उसी के हिसाब से मेहनत करनी होगी, वो भी advance में ।तभी आपको अच्छा जीवन जीने का अधिकार मिलेगा । 

मतलब……… जैसी जिंदगी, वैसी मेहनत !

दोस्तों,

     यहाँ यह कहा जा सकता है, की सब कुछ हमारे अपने हाथ में होता है हमें केवल इतना करना है कि, हम समय के साथ निश्चित गति से चलें । हम जिस भी क्षेत्र में हों, जो भी काम करें, हमारा काम जो भी हो (दोस्तों यहाँ गौर करने वाली बात ये है की कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता ) अपना काम पूरी इमानदारी के साथ करें । अपने काम को जी भर के प्यार दें । अपना ज्यादा से ज्यादा योगदान दें और हर वक़्त यही सोचें की आप अपने काम को और बेहतर कैसे बना सकते हैं? अपना सर्वस्व झोंक दें । आपके काम में आपकी छाप हो, आपका काम आपकी पहचान बन जाए । आपको अपने काम को देखकर संतुष्टी मिले।

अपना काम करके,आपको ये एहसास हो :- वाह! आज  तो आनंद आ गया ।

दोस्तो,

     ये जिंदगी आपकी अपनी है, आप इसके मालिक हो, आप कैसा जीवन जीना चाहते हो? खुद से तय करो । और जैसे जीना चाहते हो, वैसे जी भर के जीओ । ऐसा कहा जाता है कि, FEBRUARY (फरवरी) का माह (month) प्यार का समय है, चाहत का समय है, मोहब्बत का समय है………

तो दोस्तो,

            उठो, जागो और ऐलान कर दो अपनी चाहत का……

                                   चाहत………खुद से प्यार करने की !

                         चाहत……..अपने काम से मोहब्बत करने की !

                                   चाहत……जिंदगी को जिन्दादिली से जीने की !

 

                                                              आपकी हर पल की खुशियों का आकांक्षी………..

                                                                                                           आपका अपना मित्र

                                                                                                              प्रणव भारद्वाज

 


खुला आमंत्रण


दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी website www.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

 

धन्यवाद!!!

                

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2 Comments on Chahat ! Zindagi Jeene Ki…..

मधुर नागवान said : Guest Report 12 months ago

कर्तव्यनिष्ठा, लगन, ईमानदारी, धैर्य की प्रेरणा देने वाली सुन्दर कहानी और शिक्षा।

Deepak Tripathi said : Guest Report 2 years ago

लाजवाब ! सच बहुत ही प्रेरणादायक । सच कहा आपने .....अपने आप से प्यार करना , अपने काम से प्यार करना सच में ये बहुत ही बड़ी नेमत है।

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