PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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manchaha

मनचाहा परिणाम

दोस्तो,

     एक बार एक राजा ने एक भव्य मंदिर बनवाने का निर्णय किया । काफी सोच- विचार के बाद मंदिर निर्माण के लिए जगह का चुनाव किया गया । जगह का चुनाव हो गया, पर परेशानी की बात ये थी, कि जिस जगह का चुनाव किया गया था उस जगह पेड़ बहुत ज्यादा थे ।

     राजा ये चाहते थे कि जिन पेड़ों से मंदिर की शोभा बढ़े, उन पेड़ों को छोडकर शेष सभी पेड़ काट दिये जायें । पेड़ काटने के लिए दो लकड़हारों का चुनाव किया गया । दोनों को पेड़ काटने का काम सौंप दिया गया ।

     एक लकड़हारे का नाम था, कर्ण । दूसरे का नाम था अर्जुन । कर्ण और अर्जुन  अपना काम करने में पूरे उत्साह के साथ जुट गये ।

(उनके द्वारा किये गये काम का लेखा-जोखा………..)

दिन

कर्ण

 (काटे गये पेड़ों की संख्या )

अर्जुन 

(काटे गये पेड़ों की संख्या )

पहला

10

10

दूसरा

12

12

तीसरा

14

14

चौथा

14

15

पांचवा

13

17

छठा

11

18

       
       कर्ण यह देखकर काफी चिंतित रहने लगा, उसने परिश्रम किया पर परिणाम नहीं बदला । अर्जुन की पेड़ काटने की क्षमता दिन प्रति दिन बढती जा रही थी, जबकि अधिक मेहनत करने के बावजूद भी कर्ण की क्षमता घटती जा रही थी  ।  

       कर्ण ने काफी चिंतित होकर अर्जुन से पुछा “ मित्र हम दोनों ने एक-साथ कार्य शुरू किया था, हमारी शारीरिक क्षमता भी लगभग-लगभग समान ही है, हमारी कुल्हाड़ी भी समान है । पेड़ों की मोटाई भी समान है, काफी सारी समानताए है, पर परिणाम इतने अलग-अलग क्यों ? “

       मित्र, मुझे संदेह है कि तुम कुछ ऐसा कर रहे हो, जो कि अनुचित है ।  मित्र आप मुझसे कुछ न कुछ तो अवश्य छिपा रहे हो ।

   अर्जुन समझाते हुए बोला, कर्ण एक तरफ तो तुम मुझे अपना मित्र मानते हो और दूसरी तरफ तुम मुझ पर संदेह करते हो ।

       मित्र, मैं आपसे कुछ भी नहीं छिपा रहा ।

परिणाम में जो अन्तर आप देख रहे हो वो है “ क्षमताओं में विकास का” जिसके कारण मै आपसे अधिक पेड़ काट पा रहा हूँ ।

       कर्ण    :   क्या मतलब ? मै कुछ समझा नहीं ।

      अर्जुन   :  मित्र, मैं रोज शाम को अपनी कुल्हाड़ी की धार(sharpness) तेज करता हूँ । मैं रोज कुल्हाड़ी को धार लगाता हूँ, ताकि उसकी पेड़ काटने की गति तेज हो सके और मैं ज्यादा से ज्यादा पेड़ काट सकूँ ।   

      मित्र, यदि आपने गौर किया हो, तो आप देखेंगे कि शुरू में हम दोनों समान पेड़ काट रहे थे क्योकि कुल्हाड़ी तेज थी पर जैसे-जैसे इसकी धार कमजोर हुई,तुम कम पेड़ काटने लगे और मैं ज्यादा ।

      यदि तुम भी अपनी कुल्हाड़ी पर प्रतिदिन धार लगाओगे तो तुम भी अपना कार्य बेहतर कर पाओगे । कर्ण को अपनी गलती समझ आ गयी अब वो प्रतिदिन अपनी कुल्हाड़ी को तेज करता, और जल्दी ही वह ज्यादा से ज्यादा पेड़ काटने लगा।

दोस्तों,

      हमारे साथ भी तो यही होता है, हम अपने शरीर को मशीन बना लेते हैं  । दिन भर भाग-दौड़ करते हैं  । पर शरीर को उचित आराम और उचित खान-पान नहीं देते । हम अपने आप को इतना व्यस्त बना लेते हैं, की हमें अपने स्वास्थ्य का ख्याल ही नहीं रहता । हम एक उचित दिनचर्या को नहीं अपनाते जिसके कारण हम अपनी क्षमता (शारीरिक और मानसिक ) कम करते रहते हैं  ।

      यही कारण है कि हम अपनी क्षमता का सही उपयोग नहीं कर पाते, जिसके परिणाम-स्वरूप हमें मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाता और फिर हम कभी अपने आप को कोसते हैं या अपनी परिस्थितियों को ।

 

समाधान

   यदि हम मनचाहा परिणाम पाना चाहते हैं तो………….

      इसको हम ऐसे भी समझ सकते हैं कि रात्रि में सोने से पहले पूरे दिन का ईमानदारी से विश्लेषण(आपका दिन कैसा गया) करें, ताकि हम ये जान सके कि आखिर वो कौन सी वजह है? जिसके कारण हम अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं । उन वजह या कारणों का समाधान करें और शांत मन से सों जाएँ, फिर उन समाधानों को अपनाकर एक नयी ऊर्जा, उमंग, उत्साह के साथ अपने काम को करें और जो वो सब कुछ पायें, जो आप पाना चाहते हैं ।

      दिनचर्या को व्यवस्थित करके,

      शरीर का उचित ख्याल रखकर,

      समय का बेहतर प्रबंधन करके,

      अपनी क्षमताओं का विकास करके पूरी ताकत के साथ यदि हम अपना कार्य करेंगें तो हम अपनी अपनी सोच से भी कई गुणा बेहतर परिणाम पा लेंगे ।  

      तो दोस्तों, आप तैयार है, अपना जीवन बदलने के लिए …..

 

                                                    आपके खुशहाल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ………..

                                                                                                                                  आपका अपना दोस्त

                                                                                                                                  प्रणव भारद्वाज  


     खुला आमंत्रण


दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी websitewww.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

धन्यवाद!!!

 


 

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1 Comment on MANCHAAHA PARINAAM

HARVIR YADAV said : Guest Report 2 years ago

Sir bhut bindas likhte ho

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