PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

Read More....

Like Us On Face Book Page
????????????????????????????????????
LifePower Of ThinkingSelf ImprovmentSomething Special

JIDD! KARO TO SAHI

By on January 30th, 2016

जिद करो तो सही

दोस्तो,

       ये घटना काफी समय पूर्व की है। राजा धूमकेतु, अपनी प्रजा के बीच बहुत लोकप्रिय थे । उनका छोटा सा साम्राज्य था । उनके समय में प्रजा बहुत खुश थी । शासन-प्रशासन बहुत शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, कि तभी एक दिन राजा धूमकेतु को पडोसी देश के राजा का सन्देश प्राप्त हुआ ।  

सन्देश कुछ इस प्रकार से था…………

       “मैं आपके पडोसी देश का राजा वकासुर आपको ये बताना चाहता हूँ की मैंने अपने राज्य का विस्तार करने का निर्णय किया है । और मैं आपको यह आदेश देता हूँ की आप अपने राज्य को हमारे राज्य में सम्मिलित करके हमारी अधीनता को स्वीकार करें और हमारे नियमों को अपने राज्य में लागू करें अन्यथा आपको हमसे युद्ध के लिए तैयार रहना होगा । युद्ध में आपकी पराजय निश्चित है । आपको जो हानि (नुकसान) होगी उसके लिए आप स्वयं ही जिम्मेदार होंगे” ।   

आपका शुभचिंतक

राजा वकासुर  

राजा धूमकेतु जो कि बहुत स्वाभिमानी राजा थे उनको ये बात बुहत नागवार लगी ।  

       उन्होंने अपने साथियों की सभा (Meeting) बुलाई और वहां इस सन्देश पर चर्चा की । सभी लोग इस बात को लेकर बहुत परेशान होने लगे, क्योंकि चिंता की बात यह थी कि राजा धूमकेतु के पास 5000 सैनिको की फ़ौज थी जबकि राजा वकासुर के पास 100000 सैनिक थे और वो सभी आधुनिक युद्ध साजो सामान से लैस थे । राजा के अधिकांश साथियों ने चिंतित स्वर में राजा को सलाह दी “कि महाराज धूमकेतु जैसा कि आप जानते हैं हम हर तरह से विरोधी राजा से कमजोर हैं । हमारे पास विरोधी राजा से काफी कम शक्ति है तो हमारे लिए यही बेहतर है की हम उनके आदेश को स्वीकार कर लें, और राजा वकासुर को अपना राजा  घोषित कर दें ।

       राजा धूमकेतु जो ये अच्छी तरह से जानते थे की राजा वकासुर बहुत क्रूर है, उसके अधीन (नीचे)काम करना मौत को गले लगाने से कम नहीं है । राजा धूमकेतु किसी भी कीमत पर राजा वकासुर के अधीन काम नहीं करना चाहते थे, जबकि राजा ये भी जानते थे की राजा वकासुर से युद्ध में जीतना मुश्किल तो है, पर असंभव बिलकुल भी नहीं

उन्होंने राजा वकासुर से युद्ध करने का निर्णय लिया ।

राजा धूमकेतु ने ज़िद की कि चाहे कुछ भी हो जाए उनको हर हाल में युद्ध में जीतना ही है

       इसके अलावा उन्होंने अन्य किसी भी विकल्प के बारे में नहीं सोचा और अपने सेनापति को आदेश दिया की युद्ध की तैयारी की जाए ।

हम राजा वकासुर से युद्ध करेंगे और हर हाल में जीतेंगे ।

       सभी तरफ ये चर्चा होने लगी, कि युद्ध के डर से राजा धूमकेतु का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और वो डर में इस तरह की बातें कर रहे हैं “कहाँ राजा वकासुर की विशाल सेना और कहाँ हम? इन विपरीत परिस्थितिओं में हमारी सेना भला कैसे जीत सकती है?

पर राजा की जिद के आगे किसी की नहीं चली और युद्ध की घोषणा कर दी गयी ।

राजा ने सोचा की यदि हम पूरे साहस के साथ युद्ध में जाएँ और अपनी पूरी जान लड़ा दें, तो हमारी जीत निश्चित है । राजा अपनी जीत के प्रति निश्चित थे ।

राजा के लिए ये बड़ी चुनौती थी की वो अपनी सेना में भी इसी तरह का संकल्प भर दें, वो जीतने की इस भूख को अपने सैनिकों के दिल में उतार दें ।  

उन्होंने जीत की इस दीवानगी को अपनी सेना के दिल-दिमाग में उतारने की ठान ली,और अपने  विश्वसनीय (reliable) साथियों के साथ रणनीति बनाने लगे ।

राजा के सामने गम्भीर प्रतिकूल परिस्थितियां थी पर राजा ने निश्चय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए उसे हर हाल में युद्ध जीतना ही है ।

उसने इसके लिए एक रणनीति तैयार की ।

राजा धूमकेतु  ने अपने सैनिकों को जहाजों में भरा, दुश्मन देश तक समुद्र का सफ़र किया, सिपाहियों और गोला बारूद को उतारा और अपनी रणनीति के तहत उन सभी जहाजों को आग लगाने का निर्देश दिया, जो उन्हें वहां तक लाये थे ।

       युद्ध के पहले अपने सैनिकों को संबोधित करते हुए राजा धूमकेतु ने कहा कि “ आप देख रहे हैं! की हमने अपने जहाज जला दिए हैं, इसका सीधा सा मतलब यह है, कि हम यहाँ से तब तक जिंदा नहीं लौट सकते, जब तक की हम युद्ध में जीत न जाएँ । अब हमारे सामने केवल और केवल एक ही रास्ता है वो है की हमें हर हाल में युद्ध जीतना ही है हमारे पास इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है ।

       अपने राजा की  जीत के प्रति ऐसी दीवनगी देखकर सेना का मनोबल बहुत ऊँचा हो गया उनका साहस आसमान चूमने लगा, और सेना को ये विश्वास हो गया, की यदि हमने अपनी पूरी शक्ति से लड़ाई की तो जीत हमारी ही होगी । वो काल बनकर दुश्मन सेना पर टूट पड़े

भयंकर युद्ध हुआ और अंत में राजा धूमकेतु की विजय हुई।

चारों ओर राजा धूमकेतु की जय-जय कार होने लगी।  

दोस्तों,

ये जीत थी, एक राजा के जीत के प्रति अटूट विश्वास की!

ये जीत थी, राजा की जीत के प्रति दीवानगी की!

जीत थी, राजा की जिद की, जीतने की जिद की!

जीत थी हार न मानने की!  

       उसने जिद की कि चाहे कुछ भी हो जाए मुझे हर हाल में जीतना ही है, इसके अलावा मेरे पास और कोई विकल्प है ही नहीं। उसने अपने सभी विकल्प जला दिए और केवल और केवल जीतने के बारे में ही सोचा।  

परिस्थिति एकदम प्रतिकूल थी,पर राजा की जिद के सामने असंभव सी लगने वाली विजय संभव हो गयी।

और वो हो गया जो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था,

यह ताकत है हमारी जिद में!

दोस्तो,

       हमारे साथ भी तो यही होता है । हम में से अधिकाँश लोग बहुत कुछ पाना चाहते हैं, लेकिन यदि छोटी सी भी परेशानी आ जाती है, तो हम हार मान लेते हैं और हम अपना रास्ता बदल देते हैं। हम अपने आप को समझा लेते है, की ये तो बहुत कठिन है, चलो कुछ और कर लेते हैं, मतलब हम अपने हाथ में एक से अधिक विकल्प रखते हैं और यही सोचते हैं की यदि मैं ये न हासिल कर पाया तो वो पा लूँगा और वो भी नहीं तो कुछ और ।

        इसे ऐसे समझ सकते हैं की यदि किसी को I.A.S बनना है, तो अधिकांश लोगों की सोच यह रहती है की मुझे I.A.S (आई.ए.एस)की तो तैयारी करनी ही है पर मुझे साथ में और भी exams की तैयारी करनी चाहिए क्योंकि यदि I.A.S(आई.ए.एस) नहीं बना तो और कुछ तो बन ही सकता हूँ । दोस्तों जब हम विकल्पों के बारे में सोचते हैं, हम अपनी जीत की सम्भावना को कमजोर करते हैं, हमारी सोच केवल और केवल इस तरह होनी चाहिए की मुझे हर हाल में I.A.S बनना है मेरे पास अन्य कोई विकल्प है ही नहीं। यदि हम इस तरह से सोचेंगे तो हमारी सफलता निश्चित ही है ( क्योंकि यह माना गया है, की यदि आपमें सचमुच कुछ पाने की प्रबल इच्छा है और यह इच्छा एक दीवानगी बन जाए, तो दुनिया की हर ताकत आपको वो पाने में मदद करेगी जो आप पाना चाहते हैं और आप हर हाल में वो पा ही लेंगे जरुरत है तो बस जिद की

दोस्तो,

       आप जिद की ताकत से हर वो चीज पा सकते हो, जो आप पाना चाहते हो । ये मुमकिन(संभव) है, कि आपको अपनी मनचाही चीज पहले प्रयास में न मिले पर ये नामुनकिन(असंभव) है की यदि आप जिद करो और पूरी ईमानदारी से उसको हासिल करने की कोशिश करो तो वो आपको न मिले ।

दोस्तों,

       यदि हमें जीवन में सफल होना है, तो हमें जिद करनी ही होगी । हमें अपने आप से बात करनी होगी और तय करना होगा की हम वाकई में क्या पाना चाहते हैं? और एक बार निश्चित करने के बाद पूरी ईमानदारी के साथ उसको पाने के लिए अपने आप को दाव पर लगाना होगा, हमें और अन्य सभी विकल्पों (अगर/मगर)को छोड़ना होगा । हमें ये तय करना होगा की बस अब यही पाना है, केवल और केवल यही। मेरे पास इसके अलावा कोई विकल्प है ही नहीं आप देखोगे कि आपकी इस जिद से आप हर वो चीज पा लेंगे जो आप पाना चाहते हैं

दोस्तों,

      यही वो जिद है जो सफल और असफल बनाती है। सफल लोग जिद करते है कि चाहे कुछ भी हो जाए उनको अपनी मंजिल पानी ही है । वो अपने अन्य सभी विकल्प जला देते हैं (मतलब और कुछ सोचते ही नहीं) । उनको अपनी मंजिल के अलावा और कुछ सूझता ही नहीं जबकि असफल लोग जिद कर ही नहीं पाते । छोटी सी मुश्किल भी उनको काफी बड़ी लगती है, और वो अपना रास्ता ही बदल देते हैं। और फिर जिंदगी भर यही कहते रहते हैं कि उन्होंने तो कोशिश की थी, पर शायद ये उनके नसीब में था ही नहीं (जबकि वो ये जानते हैं की उन्होंने सच में ईमानदारी से कोशिश की ही नहीं) वो तो विकल्पों में ही खोये रहते हैं ।

दोस्तों,

       आप जब भी अपने जीवन में कुछ पाना चाहो, तो बस जिद करो और जिद करो की आपको केवल और केवल वो चाहिए जो आपने सोचा है। आप यकीं मानो की चाहे परिस्थितियां कैसे भी हों आपकी ज़िद के आगे हर चीज छोटी हो जाएगी और आप वो पा लेंगे जो आपने सोचा है, या उससे भी कुछ ज्यादा मतलब बहुत ज्यादा……..

 

        तो दोस्तों यदि आप अपने जीवन में कुछ पाना चाहते हो, तो मेरी आपको यही सलाह है……

enlightenedदोस्त, ज़िद  करो तो सही!enlightened

                                                                 

                                                                आपके भविष्य की  खुशियों  का आकांक्षी………….

                                                                                                                                       आपका अपना दोस्त                                                                                                                                                           प्रणव भारद्वाज


खुला आमंत्रण


दोस्तो, 
        यदि, आपके पास Hindi/English या Hinglish में कोई  motivational story, article, कविता, idea, essay, real life experience या कोई जानकारी  या  कुछ  भी ऐसा जिसे पढ़कर कुछ अच्छी सीख मिले ( चाहें वो आपके अपने मन से वयक्त किये गए हों या आपने कहीं पढ़े हों ) ……………… 

        जिसे आप हमसे share करना चाहते हैं ।

        तो, आप अपना कंटेंट (content) मुझे  info@motivatemyindia.com  पर mail कर सकते हैं  आपसे अनुरोध है कि (content) के साथ अपना एक फोटो भी भेजें।

        पसंद आने पर आपका कंटेंट जल्दी ही आपकी फोटो के साथ पर आपकी अपनी websitewww.motivatemyindia.com प्रकाशित कर दिया जाएगा ।  

धन्यवाद!!!

 

TAGS
RELATED POSTS

8 Comments on JIDD! KARO TO SAHI

Pranav Bhardwaj (Author) said : administrator Report 5 months ago

shukriya sir

Jamshed Azmi said : Guest Report 5 months ago

बहुत ही बेहतरीन जानकारी। मुझे बहुत पसंद आई। जिद करो तो सही, वाकई आपने बहुत ही बेहतरीन और गजब के शीर्षक के साथ पोस्ट की शुरूआत की। वैलडन सर। http://www.kanafusi.com/news-dog-make-money/

सुरेन्द्र महरा said : Guest Report 12 months ago

वाह ! प्रणव जी क्या जबरदस्त कहानी लिखी है आपने. और उससे बेहतर है आपका इस कहानी से संदेश. बहुत अच्छा लगा आपका यह आर्टिकल. बहुत अच्छे.

Shikayat v/s Koshish – Motivate My India said : Guest Report 2 years ago

[…] JIDD! KARO TO SAHI 4 comments | under Something Special […]

Abhishek chaudhary said : Guest Report 2 years ago

Very nice and inspirational article

mohit bhardwaj said : Guest Report 2 years ago

very nice keep it up

Amit kumar said : Guest Report 2 years ago

Apki website bhaut hi acchi hai .. Aur apki site ki post bhi acchi hai

Reshu sharma said : Guest Report 2 years ago

very nice xplain ..... Zid..... its 100% true..... thnku thanku thanku !!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked