PRANAV BHARDWAJ
Motivational Speaker / Writer

दोस्तो, मेरी हमेशा से यही कोशिश रही कि मैं कुछ ऐसा करूँ, जिससे देश/समाज में रचनात्मक व सकारात्मक परिवर्तन (Creative & Positive change) आ सके। मैंने अपनी इसी सोच के तहत परम पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से यह website बनायी है.......

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bhagya
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हम और हमारा भाग्य

By on January 4th, 2016

दोस्तो,

       आपने अक्सर, भाग्य के बारे में लोगों से सुना होगा……..

  • मेरा तो नसीब ही ख़राब है ।
  • श्याम के पास कल तक तो खाने के भी लाले थे आज देखो उसकी मौज है………..अरे भाई ! सब नसीब का खेल है ।
  • जिसके भाग्य में जो लिखा होगा उसे वो मिल कर ही रहेगा ।
  • मेरा भाग्य अच्छा होता तो अज मैं भी अमीर आदमी होता ।
  • उसकी शादी क्या हुई उसके तो भाग्य ही बदल गया ।

                                   …………..और न जाने क्या- क्या???????

लेकिन आपको जानकर ख़ुशी होगी की परम पिता परमेश्वर ने हमे एक बेहतरीन शक्ति दी है……

         अपना भाग्य खुद व खुद बनाने की

      कैसे ?????

      How we can make our fortune????????? 

दोस्तो,

     भाग्य मतलब …………हमारे अपने कर्मों का फल 

        इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि यदि हम अच्छे कर्म करेंगे, तो हमारा भाग्य स्वयं ही हमारे सौभाग्य में बदल जाएगा ।  

       तो यहाँ हमें कर्म के बारे में जानना होगा ।  

       हमारे शास्त्रों क अनुसार कर्म तीन तरह से किया जाता है…………..

                      मनसा :  मन के द्वारा    :    ( मतलब हमारी अपनी सोच के माध्यम से)

                         वाचा  :  वाणी के द्वारा   :    ( मतलब हमारी बोल चाल के माध्यम से)

                        कर्मणा :  कर्म  के  द्वारा  :    (मतलब हाथ पैरों के माध्यम से……..physically)

      इसको हम इस तरह से समझ सकते हैं की……………

      एक company को एक  product launch करना है…………….

                         तो सबसे पहले कंपनी प्रबंधन (company management ) पूरी strategy , policy plan करेगा …….ये पूरी तरह से दिमागी कसरत है ( मतलब सबसे पहले कर्म मन के स्तर पर किया जाएगा)

      उसके बाद पूरे प्लान को कागज पर स्टेटमेंट (statement) के रूप में उतारा जाएगा ताकि सभी विभागों (departments) को उनके काम समझाए (instruction) जा सकें (मतलब काम वाणी के स्तर पर )

      उसके बाद सबसे अंत में physical work होगा मतलब product making and marketing (मतलब physical स्तर पर काम किया जाएगा)

      इसे दूसरे रूप में ………               

      यदि हम अपना मकान बनबाना चाहें तो सबसे पहले मकान की रूप-रेखा हमारे मन में बनेगी ……………….मकान दिखने में कैसा होगा? बजट क्या होगा? मकान से सम्बंधित ज्यादातर चीजें हम पहले से ही सोच लेंगे ( मतलब सबसे पहले कर्म मन के स्तर पर किया जाएगा)

     उसी के आधार पर हम मकान का डिज़ाइन (design) बन बायेंगे और फिर डिज़ाइन के आधार पर ही हम मकान बनाने वाले ठेकेदार (contractor) को पूरा काम बता देंगे की हम कैसा मकान बनबाना चाहते है? क्या चीज कहाँ होनी चाहिए……कितना साइज़ होगा …सब कुछ जो हम चाहते हैं… (मतलब काम वाणी के स्तर पर )

     और उसके बाद काम शुरू किया जाएगा (ईट, सीमेंट, सरिया आदि से मकान बना दिया जाएगा (मतलब physical स्तर पर काम किया जाएगा)

     यहाँ ये कहा जा सकता है की company product की सफलता या असफलता पूरी तरह से प्लानिंग  planning पार्ट ( मतलब सबसे पहले जो कर्म मन के स्तर पर किया जाएगा ) पर ही निर्भर करेगी. जितनी बेहतर ये planning होगी  result  भी  उतने ही लाजबाब/शानदार होंगे.

            यही नियम मकान के बनाने में भी लागू होंगे और यही हमारे जीवन के हर पहलु पर……………..

            इसी तरह से हमारी सफलता में (80%-85%) योगदान हमारे मन/सोच के स्तर पर किये गये कर्म पर आधारित होता है 10% वचन के स्तर पर और शेष 5% physical स्तर पर

          क्योंकि………….

                                                    “ जैसा हम सोचते हैं,

                                                                 वैसा ही हम बोलते हैं,

                                                                            और वैसा ही हम करते हैं ”

      और जब आप अच्छा करोगे तो मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ कि आप अपने भाग्य को सौभाग्य और अपने आप को सौभाग्याशाली बना लोगे ।

           और आप अपनी जिंदगी को बेहतर से बेहतरीन (आन /वान /शान) तरीके से जियेंगे ।

 

                 आपके हर पल की खुशियों का आकांक्षी…………………

                                                             आपका अपना दोस्त

                                                                 प्रणव भारद्वाज

         हम अपनी सोच को कैसे बेहतर से बेहतरीन बनाये ………ये जानने और समझने के लिए पढ़ते रहें………………….

       www.motivatemyindia.com


खुला आमंत्रण

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